अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उसके नेतृत्व और मौजूदा हालात पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अमेरिकी सैन्य बलों को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश का अमेरिका मजबूती से जवाब देगा।
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर साधा निशाना
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ईरानी सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने ईरान को विफल राष्ट्र बताते हुए दावा किया कि देश आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान कई गंभीर आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है और उसकी आर्थिक स्थिति लगातार दबाव में है। साथ ही उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए।
होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य कार्रवाई से बढ़ी चिंता
यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच करीब एक महीने बाद फिर सैन्य टकराव की खबरें आई हैं। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईरान के दो रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया गया।
अमेरिका के अनुसार, इन लॉन्चर का इस्तेमाल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के आसपास सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम जलमार्ग माना जाता है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई, मिसाइलें रोकने का दावा
सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन की दिशा में मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा प्रणाली ने बीच रास्ते में ही रोक दिया।
दोनों देशों की इस सैन्य गतिविधि के बाद क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।
अमेरिकी सैनिकों पर हमला हुआ तो मिलेगा जवाब
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य बलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा और सेना हर संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार है।
मध्य पूर्व पर पड़ सकता है बड़ा असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर मध्य पूर्व के दूसरे देशों और वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की रणनीति यह तय कर सकती है कि मौजूदा तनाव बातचीत की दिशा में जाएगा या फिर क्षेत्र में नया संकट खड़ा होगा।

