वॉशिंगटन। अमेरिका में पंजाब मूल के गुरमीत सिंह के खिलाफ फेडरल कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है। रेप और अपहरण के गंभीर अपराधों से जुड़ी जानकारी नागरिकता आवेदन के दौरान छिपाने के मामले में उनकी अमेरिकी नागरिकता रद्द कर दी गई है। अदालत ने माना कि उन्होंने महत्वपूर्ण आपराधिक तथ्यों को छिपाकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी।
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इस कार्रवाई को लेकर स्पष्ट कहा कि अमेरिकी नागरिकता अपराध करने वालों के लिए सुरक्षा का माध्यम नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि गुरमीत सिंह ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान रेप और अपहरण से जुड़े अपराधों की जानकारी छिपाई थी।
1992 में पहुंचे अमेरिका, 2000 में बने स्थायी निवासी
गुरमीत सिंह वर्ष 1992 में अस्थायी वीजा पर अमेरिका पहुंचे थे। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्हें स्थायी निवासी का दर्जा मिला। वर्ष 2011 में उन्होंने अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया।
आरोपों के अनुसार, नागरिकता आवेदन करने से कुछ सप्ताह पहले टैक्सी चालक के रूप में काम कर रहे गुरमीत सिंह ने एक महिला यात्री के साथ रेप किया और उसका अपहरण किया। हालांकि, नागरिकता की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने इस मामले की जानकारी छिपाई।
अक्टूबर 2011 में उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल गई थी।
बाद में न्यूयॉर्क कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा
बाद में न्यूयॉर्क में गुरमीत सिंह को फर्स्ट डिग्री रेप और सेकंड डिग्री अपहरण के मामले में दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नागरिकता हासिल करते समय अपराधों से जुड़ी जानकारी छिपाना कानूनी प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन था। इसी आधार पर उनकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई की गई।
26 अगस्त को आया फेडरल कोर्ट का आदेश
गुरमीत सिंह की नागरिकता रद्द करने का आदेश फेडरल कोर्ट ने 26 अगस्त को जारी किया। यह फैसला अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से 2 फरवरी को दर्ज कराई गई शिकायत के बाद आया।
असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए शुमेट ने कहा कि गंभीर आपराधिक कृत्यों की जानकारी छिपाकर अमेरिकी नागरिकता के विशेषाधिकार हासिल किए गए थे। वहीं, अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला जूनियर ने इसे धोखाधड़ी के जरिए नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों के लिए सख्त संदेश बताया।
न्याय विभाग ने बताया गंभीर कानूनी कार्रवाई
इस मामले में न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के ऑफिस ऑफ इमिग्रेशन लिटिगेशन और ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क के अधिकारियों ने अभियोजन की कार्रवाई की।
यह मामला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में गलत जानकारी देना या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है। फेडरल कोर्ट के फैसले के बाद गुरमीत सिंह अब अमेरिकी नागरिक नहीं रहे हैं।

