अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे और कथित चंदा चोरी से जुडे विवाद को लेकर संत समाज के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। देशभर के संतों की प्रस्तावित बैठक को लेकर राष्ट्रीय उच्चाधिकार समिति के महासचिव और मध्य प्रदेश के संत महामंडलेश्वर नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कंप्यूटर बाबा का दावा है कि उन्होंने राम मंदिर से जुडे कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर चर्चा और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर संतों की बैठक आयोजित की थी, लेकिन प्रशासन ने इस बैठक को होने नहीं दिया।
CBI जांच की मांग उठाई
कंप्यूटर बाबा ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से आने वाले चढ़ावे से जुडे कथित चोरी के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए चढ़ावे और दान से जुडे मामलों में पूरी पारदर्शिता आवश्यक है।
उनके अनुसार यदि किसी स्तर पर आर्थिक अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
बैठक का कार्यक्रम बदला, फिर भी संतों से हुई चर्चा
कंप्यूटर बाबा के मुताबिक प्रशासन की ओर से कथित तौर पर बैठक की अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने कारसेवकपुरम के पास एक गेस्ट हाउस में रामधाम के कुछ संतों और महंतों के साथ बैठक की।
बैठक के बाद कंप्यूटर बाबा और उनके साथ मौजूद संतों ने बाहर आकर कथित चंदा चोरी के विरोध में नारे भी लगाए। उनका कहना है कि यह विषय केवल पैसों से संबंधित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुडा हुआ है।
पारदर्शिता को लेकर संत समाज की मांग
कंप्यूटर बाबा ने कहा कि राम मंदिर से जुडे आर्थिक मामलों में व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उनका दावा है कि संत समाज किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाने के उद्देश्य से यह मुद्दा नहीं उठा रहा है, बल्कि वह पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच की मांग कर रहा है।
उनके अनुसार जांच होने से आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी और इससे श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।
प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
संतों की प्रस्तावित बैठक को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खडे किए गए हैं। कंप्यूटर बाबा का आरोप है कि बैठक रोककर प्रशासन ने संतों को अपनी बात रखने से रोकने का प्रयास किया।
हालांकि, इस आरोप पर प्रशासन की ओर से फिलहाल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में बैठक को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति प्रशासन के पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विवाद आगे बढने के संकेत
राम मंदिर से जुडे दान और चढ़ावे का विषय श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुडा है। मंदिर निर्माण के दौरान देशभर से व्यापक स्तर पर सहयोग और आर्थिक योगदान मिला था। ऐसे में दान और चढ़ावे से संबंधित किसी भी आरोप पर स्वाभाविक रूप से व्यापक 관심 बना रहता है।
कंप्यूटर बाबा ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि आवश्यकता पडने पर संत समाज के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार की जा सकती है।
फिलहाल अयोध्या में संतों की बैठक को लेकर विवाद गहरा गया है। अब प्रशासन की प्रतिक्रिया और कथित चढ़ावा चोरी की जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

