वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। एक नए सर्वे के अनुसार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी जनता का समर्थन कमजोर पड़ रहा है, जबकि लंबे संघर्ष की आशंका और बढ़ती आर्थिक चिंताएं भी लोगों को परेशान कर रही हैं।
सैन्य कार्रवाई के समर्थन में आई कमी
रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के मुताबिक, केवल 31 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं। मार्च की तुलना में इस मुद्दे पर समर्थन में गिरावट दर्ज की गई है।
लंबे समय तक युद्ध चलने की आशंका, आर्थिक दबाव और ऊर्जा की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता को जनता के बदलते रुख की बड़ी वजह माना जा रहा है।
ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 33 प्रतिशत
सर्वे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 33 प्रतिशत बताई गई है, जो उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के सबसे निचले स्तरों में शामिल है। ईरान को लेकर प्रशासन की रणनीति, सैन्य संघर्ष की अवधि और इसके संभावित आर्थिक परिणाम अब घरेलू राजनीति में अहम मुद्दे बनते जा रहे हैं।
ट्रंप के आलोचकों का कहना है कि संघर्ष को लेकर स्पष्ट रणनीति की कमी और युद्ध लंबा खिंचने की आशंका से जनता का भरोसा प्रभावित हुआ है।
83 प्रतिशत लोगों को सता रहा लंबी जंग का डर
सर्वे में करीब 83 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने आशंका जताई कि ईरान के साथ संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है। यह चिंता ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि विदेशी सैन्य अभियानों का असर अमेरिका की घरेलू राजनीति और मतदाताओं की सोच पर पड़ता रहा है।
महंगाई और पेट्रोल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
ईरान के साथ तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई का दबाव अमेरिकी परिवारों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चला और ऊर्जा कीमतों में तेजी बनी रही तो इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।
रिपब्लिकन समर्थकों के रुख में भी बदलाव
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर केवल विपक्षी मतदाताओं में ही नहीं, बल्कि रिपब्लिकन समर्थकों के बीच भी समर्थन में कमी देखी गई है। मार्च की तुलना में ट्रंप के अपने राजनीतिक आधार के भीतर भी इस मुद्दे पर सोच बदलती दिखाई दे रही है।
यह स्थिति ट्रंप के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आगामी चुनावों के मद्देनजर उनके समर्थक वर्ग का रुख राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप प्रशासन का क्या है पक्ष
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान के खिलाफ उठाए गए कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखकर किए गए हैं। प्रशासन का तर्क है कि सैन्य दबाव और प्रतिबंधों के माध्यम से ईरान की नीतियों में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, विरोधियों का कहना है कि लंबे सैन्य संघर्ष से क्षेत्रीय अस्थिरता और आर्थिक समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
तेल बाजार से लेकर वैश्विक व्यापार तक असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजार भी इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं।
अब ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संघर्ष को नियंत्रित करने, जनता का भरोसा बनाए रखने और संभावित आर्थिक दबाव को कम करने की है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका राजनीतिक लाभ ट्रंप के विरोधियों को मिल सकता है और आने वाले चुनावों में ईरान का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।

