उत्तर प्रदेश : राजधानी लखनऊ में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। बीबीडी क्षेत्र में पांच वर्षीय हर्षित की नाली के पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में चीख पुकार मच गई।जानकारी के मुताबिक, हर्षित शाम के समय अपने एक दोस्त के साथ टॉयलेट करने गया था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह पास में मौजूद पानी से भरे गड्ढे में जा गिरा। बच्चे के गिरने की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उसे बाहर निकाला।
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकता रहा परिवार
बच्चे को गंभीर हालत में लेकर परिजन सबसे पहले चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए उसे लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया।परिजनों का आरोप है कि लोहिया अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चे को तत्काल इलाज नहीं मिला। उनका दावा है कि काफी देर तक उपचार नहीं मिलने के कारण उन्होंने बच्चे को शहीद पथ स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल ले जाने का फैसला किया।वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद हर्षित को मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
इलाज में देरी के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
परिवार ने आरोप लगाया है कि अगर बच्चे को समय रहते आवश्यक उपचार मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने भी घटनाक्रम पर नजर रखनी शुरू कर दी है। अस्पताल में उपचार से इनकार या देरी के आरोपों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों की ओर से तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
खुले गड्ढे और जलभराव पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने इलाके में खुले पड़े गड्ढों और जलभराव की समस्या को लेकर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान कई गड्ढे पानी से भर जाते हैं और उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।विशेष रूप से बच्चों के लिए ऐसे स्थान बेहद जोखिम भरे हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खुले गड्ढों और जलभराव वाले खतरनाक स्थानों को चिन्हित कर वहां सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
हादसे ने व्यवस्था के सामने खड़े किए दो बड़े सवाल
हर्षित की मौत ने एक साथ दो गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। पहला, शहर में खुले गड्ढों और जलभराव वाले स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और दूसरा, आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था।फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां क्या थीं और अस्पताल में इलाज को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। परिवार अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग कर रहा है।

