जम्मू-कश्मीर : डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा करने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लगातार केंद्र के सामने जम्मू-कश्मीर से जुड़े विकास और राजनीतिक मुद्दे उठा रहे हैं।
चौधरी के मुताबिक, मुख्यमंत्री की हालिया मुलाकात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई थी। इस दौरान राज्य का दर्जा बहाल करने के साथ आरक्षण व्यवस्था को तर्कसंगत बनाने, कामकाज से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने और श्रीनगर में प्रस्तावित पहले इंटरनेशनल फिल्मफेयर फेस्टिवल समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
संसद और सुप्रीम कोर्ट के वादे का दिया हवाला
डिप्टी सीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने के संबंध में संसद और सुप्रीम कोर्ट के सामने किए गए वादों को पूरा करेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह वादा पूरा नहीं किया जाता है तो इसका असर सिर्फ जम्मू-कश्मीर की जनता पर नहीं पड़ेगा, बल्कि संसद और न्यायपालिका के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े होंगे।
MBBS इंटर्न की हड़ताल पर सरकार कर रही व्यापक विचार
31 अगस्त से मासिक स्टाइपेंड में कथित असमानता को लेकर हड़ताल कर रहे MBBS इंटर्न के मुद्दे पर भी चौधरी ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को किसी एक मांग तक सीमित करके नहीं देख रही है, बल्कि पूरे विषय पर व्यापक स्तर पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ये युवा डॉक्टर स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और लोगों के इलाज में उनकी बड़ी भूमिका है। सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर डिप्टी CM का तीखा हमला
2 सितंबर को श्रीनगर के लाल चौक में बीजेपी की ओर से किए गए सरकार विरोधी प्रदर्शन पर चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदर्शन को राजनीतिक दिखावा बताते हुए आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य जम्मू के लोगों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाना था।
डिप्टी सीएम ने बीजेपी नेतृत्व से कहा कि अगर वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के मुद्दों को लेकर गंभीर है तो उसे जम्मू में भी इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर बेरोजगारी, परिवहन, होटल कारोबार और उद्योग से जुड़े लोगों की परेशानियों का उल्लेख किया।
स्थानीय अधिकारियों को बड़े पदों पर अवसर देने की मांग
चौधरी ने जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारियों की दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियुक्तियों का मुद्दा भी उठाया। उनका सवाल था कि यदि जम्मू-कश्मीर के अधिकारी देश के दूसरे हिस्सों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं तो उन्हें अपने ही प्रदेश में ऐसे पद क्यों नहीं दिए जा सकते।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कई योग्य स्थानीय IPS अधिकारी मौजूद हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
यूनिवर्सिटी और संस्थानों में स्थानीय प्रतिभाओं को मौका देने पर जोर
डिप्टी सीएम ने विश्वविद्यालयों और दूसरे प्रमुख संस्थानों में निदेशक तथा कुलपति जैसे पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि योग्य स्थानीय पेशेवरों और शिक्षाविदों को भी इन जिम्मेदारियों के लिए उचित अवसर मिलना चाहिए।
चौधरी ने इसे सिर्फ अधिकारियों की नियुक्ति का विषय नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं और पेशेवर वर्ग की उम्मीदों से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही प्रदेश में आगे बढ़ने और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने के अवसर मिलने चाहिए।
जम्मू के लोगों की समस्याओं को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
डिप्टी सीएम ने दावा किया कि जम्मू में परिवहन से लेकर उद्योग और रोजगार तक कई वर्ग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बीजेपी से इन मुद्दों पर जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि राजनीतिक प्रदर्शन से अधिक जरूरी जनता की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करना है।
राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा, स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति और युवाओं को अवसर देने जैसे विषय आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अहम बने रहने की संभावना है।

