दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था और भवन सुरक्षा को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। हादसे के एक दिन बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के सामने सात प्रमुख मांगें रखी हैं। पार्टी ने पीजी संचालकों और कथित पीजी माफिया की भूमिका की जांच से लेकर राजधानी के संवेदनशील इलाकों में भवनों के स्ट्रक्चरल ऑडिट तक की मांग की है।
पीजी माफिया और सिस्टम के गठजोड़ की जांच की मांग
CJP ने कथित पीजी माफिया और प्रशासनिक तथा राजनीतिक व्यवस्था के बीच संभावित संबंधों की स्वतंत्र आपराधिक जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि घनी आबादी वाले छात्र और पीजी इलाकों में भवनों की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
दिल्ली की शैक्षणिक इमारतों का हो स्ट्रक्चरल ऑडिट
पार्टी ने दिल्ली की एजुकेशनल बिल्डिंग्स और छात्र बहुल क्षेत्रों में मौजूद भवनों का इंजीनियरिंग स्तर पर स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। इसके साथ ही हौज रानी घटना के बाद गठित 13 जिला समितियों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई है।
CJP ने ऐसे भवनों का सार्वजनिक डेटाबेस तैयार करने की मांग की है, जिनका स्ट्रक्चरल ऑडिट पूरा हो चुका है और जिन्हें सुरक्षित घोषित किया गया है। इससे छात्रों और किरायेदारों को रहने के लिए जगह चुनते समय भवन की सुरक्षा संबंधी जानकारी मिल सकेगी।
हॉस्टल की कमी को बताया बड़ी वजह
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली में छात्रों के लिए पर्याप्त आवास नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया। CJP के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय में फिलहाल करीब 7 हजार छात्रों के लिए ही हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है।
पार्टी ने छात्र आवास की क्षमता बढ़ाने की मांग की है, ताकि बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी पर निर्भर न रहना पड़े। पार्टी का तर्क है कि सुरक्षित और पर्याप्त छात्र आवास उपलब्ध होने से अनधिकृत या असुरक्षित भवनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
मृतकों के परिजनों को 1 करोड़, घायलों को 20 लाख देने की मांग
सत्य निकेतन हादसे में प्रभावित परिवारों के लिए CJP ने आर्थिक सहायता की मांग भी रखी है। पार्टी ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये और घायलों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।
इसके अलावा पार्टी ने मंत्री आशीष सूद की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए राहत और बचाव व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। CJP ने मलबा हटाने के लिए आधुनिक मशीनरी की कमी का आरोप लगाया और सरकारी एंबुलेंस के पहुंचने में कथित देरी को लेकर भी जवाबदेही तय करने की मांग की।
हादसे के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली के छात्र और पीजी इलाकों में भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। CJP की मांगों में जांच, जवाबदेही, मुआवजा और सुरक्षित आवास की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अब अहम सवाल यह है कि हादसे के बाद प्रशासन भवन सुरक्षा को लेकर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या संवेदनशील इलाकों में मौजूद अन्य इमारतों की सुरक्षा जांच के लिए कोई व्यापक अभियान शुरू किया जाता है।

