भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में क्वारंटीन किए गए पांच ओरंगुटान बच्चों में से एक की तबीयत बिगड़ने के बाद वन्यजीव अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। बच्चे को लगातार बुखार की शिकायत है और दवाओं के जरिए तापमान नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। पशु चिकित्सकों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
इन पांचों ओरंगुटान बच्चों को 8 सितंबर को बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक स्थित बिचित्रपुर जंगल से रेस्क्यू किया गया था। उसी रात उन्हें नंदनकानन की क्वारंटीन सुविधा में रखा गया था। चूंकि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं, इसलिए उनकी स्वास्थ्य निगरानी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
दवा देने के बाद कम होता है बुखार, फिर बढ़ जाता है तापमान
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रभावित ओरंगुटान को नंदनकानन लाए जाने के समय से ही बुखार की समस्या है। दवा देने के बाद उसका तापमान सामान्य स्तर की ओर आता है, लेकिन कुछ समय बाद फिर बढ़ जाता है। फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उसे लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
बाकी चार ओरंगुटान बच्चों की हालत सामान्य है। अधिकारी उनके व्यवहार और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।
58 नए जानवर आने से क्वारंटीन परिसर में बढ़ा दबाव
नंदनकानन में हाल ही में 58 नए जानवर आने के बाद क्वारंटीन क्षेत्र में जगह का दबाव बढ़ा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ओरंगुटान बच्चों के लिए अलग व्यवस्था की गई है।
उनके लिए तापमान नियंत्रित कमरे की व्यवस्था की गई है। मच्छरों से बचाव के लिए कमरे में मच्छरदानी भी लगाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, नए वातावरण में पहुंचने के बाद तनाव, थकान या अचानक बदले मौसम और वातावरण के कारण भी जानवरों के शरीर का तापमान प्रभावित हो सकता है।
वर्षावन के जीव हैं ओरंगुटान, नए माहौल में ढलने में लग सकता है समय
पशु चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि ओरंगुटान सामान्य तौर पर वर्षावन के वातावरण में रहने वाले जीव हैं। ऐसे में उन्हें नए वातावरण में सहज होने में कुछ समय लग सकता है। उनके व्यवहार, भोजन और शारीरिक तापमान में होने वाले बदलावों को लगातार दर्ज किया जा रहा है।
ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ के प्रमुख आदित्य आचार्य के अनुसार, ओरंगुटान के शरीर के तापमान की निगरानी भी नियमित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत की जाती है। अधिक तापमान की स्थिति में पशु चिकित्सक आवश्यक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं और भोजन की मात्रा में भी बदलाव किया जा सकता है।
ओडिशा सरकार ने बनाई पांच सदस्यीय तकनीकी समिति
पांचों ओरंगुटान बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी के लिए ओडिशा सरकार ने पांच सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया है। समिति का काम रेस्क्यू किए गए जानवरों के स्वास्थ्य, कल्याण और रखरखाव से जुड़े मामलों का आकलन करना है।
जरूरत पड़ने पर समिति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों या संबंधित संस्थाओं से सलाह भी ले सकती है। इसका उद्देश्य ओरंगुटान बच्चों के लिए वैज्ञानिक और सुरक्षित देखभाल व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
हर दो घंटे में भोजन, दूध और फलों के जूस से तैयार डाइट
चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन और PCCF वाइल्डलाइफ पी.के. झा के अनुसार, ओरंगुटानों की देखभाल के लिए तीन केयरटेकर और डॉक्टर चौबीसों घंटे तैनात किए गए हैं। हालांकि उन्होंने एक ओरंगुटान को बुखार होने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई और कहा कि देखभाल करने वाले बच्चों की उचित निगरानी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की सलाह से तैयार डाइट चार्ट के अनुसार ओरंगुटानों को लगभग हर दो घंटे में भोजन दिया जा रहा है। इसमें दूध के साथ सेब और केले का जूस तथा उबले हुए आलू शामिल हैं।
तनाव कम करने के लिए सॉफ्ट टॉय, झूले और संगीत की व्यवस्था
रेस्क्यू के बाद बच्चों को नए वातावरण में मानसिक रूप से सहज रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। क्वारंटीन परिसर में उन्हें सॉफ्ट टॉय और झूले दिए गए हैं। तनाव कम करने के उद्देश्य से उनके आसपास संगीत भी बजाया जाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, रेस्क्यू के बाद जानवरों को केवल भोजन और चिकित्सा देना ही पर्याप्त नहीं होता। उनके व्यवहार, मानसिक स्थिति और नए वातावरण में अनुकूलन पर भी नजर रखना जरूरी होता है।
वन्यजीव तस्करी के एंगल से जांच भी तेज
ओरंगुटान बच्चों के जंगल में मिलने के बाद इस मामले की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है। ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो कथित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
फिलहाल नंदनकानन में सभी पांच ओरंगुटान बच्चों को क्वारंटीन व्यवस्था में रखा गया है। एक बच्चे के बार-बार बढ़ रहे तापमान को देखते हुए उसकी विशेष निगरानी की जा रही है, जबकि बाकी चार की स्थिति सामान्य बताई गई है।

