नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले में 17 सितंबर से लापता 8 महीने की बच्ची रविवार को सुरक्षित मिल गई। बच्ची नंदगांव तालुका के मन्याद पुलिस चौकी क्षेत्र से लापता हुई थी। तीन दिन तक तलाश के बाद वह पड़ोसी येओला तालुका के वैबोथी गांव के पास मिली।
लावारिस हालत में मिली बच्ची
बच्ची के मिलने की सूचना के बाद येओला तालुका पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अपनी निगरानी में लिया। इसके बाद नंदगांव पुलिस और बच्ची की मां ने उसकी पहचान की। बच्ची को एहतियात के तौर पर मेडिकल जांच के लिए येओला सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल ले जाया गया।
मासूम के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। पुलिस ने भी बच्ची की हालत सामान्य होने की पुष्टि के बाद उसके परिवार को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की।
बच्ची वहां कैसे पहुंची, पुलिस खंगाल रही हर कड़ी
बच्ची मन्याद क्षेत्र से वैबोथी गांव के पास तक कैसे पहुंची, उसे वहां कौन लेकर आया और उसे लावारिस हालत में क्यों छोड़ा गया, इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। पुलिस बच्ची के लापता होने से लेकर उसके बरामद होने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।
जांच में पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ बच्ची के लापता होने के समय और उसके बाद की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल बच्ची के सुरक्षित मिलने को सबसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
ओडिशा में भी 101 लापता बच्चों का रेस्क्यू
इसी बीच ओडिशा में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध विभाग तथा राज्य पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 101 लापता बच्चों को बरामद किया है। इनमें 54 लड़के और 47 लड़कियां शामिल हैं।
अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर जमीनी स्तर पर तलाश की, मिले सुरागों की पुष्टि की और स्थानीय प्रशासन तथा चाइल्ड केयर संस्थाओं के साथ समन्वय किया।
17 टीमें कई राज्यों में भेजी गईं
लापता बच्चों की तलाश के लिए 17 विशेष टीमों को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भेजा गया, जहां ओडिशा के लापता बच्चों के मिलने की संभावना अधिक रहती है। अभियान के दौरान आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, नई दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से बच्चों को बरामद किया गया।
बरामद बच्चों में सबसे छोटी 3 महीने की बच्ची थी, जो अपनी नाबालिग मां के साथ एक संस्था में रह रही थी। वहीं एक अन्य बच्चा 5 साल से अधिक समय से अपने घर से दूर था। उसकी बरामदगी इस अभियान की अहम उपलब्धियों में शामिल रही।

