पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर स्थित रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों की गिनती और इन्वेंट्री तैयार करने का काम राज्य सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से जारी है। मंदिर की नियमित पूजा-पद्धति और दैनिक कार्यक्रम प्रभावित न हों, इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
इसी बीच कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन के उस बयान के बाद विवाद शुरू हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रत्न भंडार की इन्वेंट्री और गहनों की गिनती से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इस निर्णय को लेकर मंदिर से जुड़े सेवकों के बीच अलग-अलग राय सामने आई है।
मुख्य बडाग्राही ने पूछा, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं तो इन्वेंट्री का उद्देश्य क्या
भगवान जगन्नाथ के मुख्य बडाग्राही जगन्नाथ स्वैन महापात्र ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि तैयार की गई रिपोर्ट जनता के सामने नहीं लाई जानी है, तो इतनी महत्वपूर्ण इन्वेंट्री तैयार करने का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
उनके अनुसार, पुराने समय में रत्न भंडार की जानकारी गोपनीय रखने के पीछे सुरक्षा की वजह थी। उस दौर में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और पर्याप्त सुरक्षाकर्मी उपलब्ध नहीं थे। वर्तमान समय में न्यायिक अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा रत्न भंडार का निरीक्षण किया जा चुका है, इसलिए परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं।
महापात्र ने यह भी कहा कि अतीत में रत्न भंडार से जुड़ी जानकारियां सामने आती रही हैं। ऐसे में अब इन्वेंट्री रिपोर्ट को गोपनीय रखने का फैसला लोगों के बीच सवाल पैदा कर सकता है।
सरकार को भविष्य में और आलोचना झेलनी पड़ सकती है
जगन्नाथ स्वैन महापात्र ने कहा कि सरकार पहले ही इस मुद्दे पर आलोचना का सामना कर रही है। यदि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तो आने वाले समय में सरकार के निर्णय पर इससे कहीं अधिक सवाल उठ सकते हैं।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि भगवान जगन्नाथ के आभूषण और अन्य बहुमूल्य सामग्री मंदिर की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हैं। इनका उपयोग देवता की सेवा और परंपरागत अनुष्ठानों के अनुरूप होना चाहिए तथा इन्हें केवल सुरक्षित रखने के बजाय धार्मिक आवश्यकता के अनुसार उपयोग में लाया जाना चाहिए।
वरिष्ठ दैतापति सेवक बोले, श्रद्धालु रघुनाथ वेश में देख सकेंगे आभूषण
दूसरी ओर वरिष्ठ दैतापति सेवक विनायक दास महापात्र ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर अलग राय रखी। उनका कहना है कि भगवान जगन्नाथ के रत्नजड़ित आभूषणों का विवरण सार्वजनिक करना मंदिर की परंपरा का हिस्सा नहीं रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को श्रद्धालुओं को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि भगवान जगन्नाथ के रघुनाथ वेश में इस्तेमाल होने वाले सभी आभूषण सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति ठीक है। भक्त इन आभूषणों को धार्मिक परंपरा के अनुसार रघुनाथ वेश के दौरान प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं।
तीन चाबियों से खुलता है रत्न भंडार, आभूषण सुरक्षित होने का दावा
वरिष्ठ सेवक गौराहरी प्रधान ने बताया कि रत्न भंडार की सुरक्षा की जिम्मेदारी भगवान लोकनाथ को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि रत्न भंडार तक पहुंचने के लिए तीन चाबियों की आवश्यकता होती है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रधान के अनुसार, रत्नजड़ित आभूषण सुरक्षित हैं और वर्ष 1978 में हुई पिछली गिनती के दौरान तैयार की गई इन्वेंट्री से उनका मिलान किया गया है। उनका तर्क है कि जब आभूषण सुरक्षित हैं और पुराने रिकॉर्ड से उनका मिलान हो रहा है, तब विस्तृत रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं है।
एक ही मुद्दे पर मंदिर सेवकों की अलग-अलग राय
रत्न भंडार की इन्वेंट्री को लेकर सामने आए बयानों से स्पष्ट है कि मंदिर से जुड़े लोगों के बीच रिपोर्ट सार्वजनिक करने को लेकर एकराय नहीं है। एक पक्ष इसे पारदर्शिता के लिहाज से जरूरी मान रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि भगवान के आभूषणों की सुरक्षा और धार्मिक परंपराएं सार्वजनिक विवरण से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल गहनों की गिनती और इन्वेंट्री तैयार करने की प्रक्रिया सरकार की निर्धारित गाइडलाइंस के अनुसार जारी है। रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा या इसे गोपनीय रखा जाएगा, इसे लेकर सरकार का मौजूदा रुख कानून मंत्री के बयान के अनुरूप ही दिखाई दे रहा है।

