इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई, मनोरंजन और संवाद का अहम माध्यम बन चुका है, लेकिन डिजिटल दुनिया में उनके सामने गंभीर खतरे भी बढ़ रहे हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से 17 वर्ष की उम्र के हर पांच में से एक बच्चे ने इंटरनेट पर किसी न किसी तरह के यौन शोषण या उत्पीड़न का सामना किया है।
21 देशों में किए गए इस अध्ययन में करीब 21 हजार इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बच्चों को शामिल किया गया। सर्वे में अनचाहा यौन कंटेंट दिखाए जाने, ऑनलाइन बातचीत के लिए दबाव बनाने और निजी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल जैसी घटनाएं सामने आईं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों को बनाया जा रहा निशाना
रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया ऐसे मामलों का प्रमुख माध्यम बनकर सामने आया है। फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों को निशाना बनाए जाने के मामले सामने आए।
कई घटनाओं में पहले बच्चों से दोस्ती या बातचीत शुरू की गई। इसके बाद भावनात्मक दबाव बनाकर उनसे निजी जानकारी, फोटो या अन्य संवेदनशील सामग्री हासिल करने की कोशिश की गई। चिंता की बात यह भी है कि कुछ मामलों में बच्चों को परेशान करने वाला व्यक्ति उनके परिचितों के दायरे से ही जुड़ा हुआ था।
एक साल में करोड़ों बच्चों तक पहुंचा ऑनलाइन खतरा
यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार, अध्ययन में शामिल देशों में लगभग 2 करोड़ इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बच्चे एक साल की अवधि में ऑनलाइन यौन शोषण या उत्पीड़न से प्रभावित हुए। इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल थे जिन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ यौन सामग्री दिखाई गई या निजी तस्वीरें साझा करने के लिए मजबूर किया गया।
रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि इंटरनेट के तेजी से विस्तार के साथ बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने की जरूरत है।
AI ने बढ़ाई मुश्किल, फर्जी तस्वीरों का खतरा गंभीर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने ऑनलाइन बाल सुरक्षा की चुनौती को और जटिल बना दिया है। AI तकनीक के जरिए बच्चों की फर्जी अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार किए जाने का खतरा बढ़ रहा है।
ऐसे मामलों को रोकने के लिए केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। बच्चों को डिजिटल सुरक्षा की जानकारी देना, अभिभावकों को सतर्क रखना और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा।
डर और शर्म के कारण सामने नहीं आते कई मामले
ऑनलाइन शोषण की घटनाओं के बावजूद बहुत कम मामले आधिकारिक शिकायत तक पहुंच पाते हैं। कई बच्चे डर, शर्म या परिणामों की चिंता के कारण किसी को जानकारी नहीं देते। कुछ बच्चों को यह भी पता नहीं होता कि ऐसी स्थिति में मदद कहां से ली जा सकती है।
यूनिसेफ ने सरकारों और तकनीकी कंपनियों से बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने पर जोर दिया है। रिपोर्ट का संदेश साफ है कि इंटरनेट बच्चों के सीखने और आगे बढ़ने का माध्यम बने, इसके लिए ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

