ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में बाघिन जीनत अब अपने नए घर में पूरी तरह अनुकूल हो चुकी है। लगातार निगरानी और जंगल में सफलतापूर्वक क्षेत्र बनाने के बाद वन अधिकारी उसके गले में लगे रेडियो कॉलर को हटाने पर विचार कर रहे हैं।
कई इलाकों में भटकने के बाद सिमलीपाल में ठिकाना
जीनत को नवंबर 2024 में महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से ओडिशा लाया गया था। सिमलीपाल से निकलने के बाद वह ओडिशा के साथ पश्चिम बंगाल और झारखंड के जंगलों में भी घूम चुकी है। दिसंबर 2024 में उसे पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से दोबारा पकड़ा गया और सिमलीपाल में छोड़ा गया।
इसके बाद उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। वन अधिकारियों के अनुसार, जीनत ने सिमलीपाल के जंगल में अपना क्षेत्र स्थापित कर लिया है और अब वह यहां स्थायी रूप से बस चुकी है।
चार शावकों को दिया जन्म
सिमलीपाल में रहने के दौरान जीनत ने चार शावकों को जन्म दिया। अधिकारियों का मानना है कि यह उसके जंगल के वातावरण में सफलतापूर्वक अनुकूल होने का महत्वपूर्ण संकेत है।
एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर प्रकाश चंद गोगिनेनी के अनुसार, बाघिन के व्यवहार और गतिविधियों पर लगातार निगरानी के बाद अब रेडियो कॉलर हटाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
मानसून के बाद हो सकता है फैसला
वन विभाग मानसून समाप्त होने के बाद जीनत के गले से रेडियो कॉलर हटाने पर विचार कर रहा है। खास बात यह है कि कॉलर को बाघिन को बेहोश किए बिना दूर से ही हटाया जा सकता है।
रेडियो कॉलर हटाने का फैसला इस बात का संकेत भी होगा कि अधिकारियों को उसकी गतिविधियों और सिमलीपाल में उसके स्थायी ठिकाने को लेकर पर्याप्त भरोसा हो गया है।
जमुना पर भी लगातार निगरानी
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से अक्टूबर 2024 में सिमलीपाल लाई गई दूसरी बाघिन जमुना के गले में भी रेडियो कॉलर लगा है। वन विभाग उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है।
जीनत और जमुना को दूसरे टाइगर रिजर्व से सिमलीपाल लाने का उद्देश्य क्षेत्र में बाघों की आबादी और आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना है। जीनत का सिमलीपाल में सफलतापूर्वक बसना इस संरक्षण प्रयास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

