नई दिल्ली। भारत की विदेश और रक्षा नीति को लेकर देश की युवा पीढ़ी की सोच में बदलाव के संकेत मिले हैं। सितंबर 2026 में सामने आए एक नए सर्वे के मुताबिक, भारतीय Gen Z इजराइल को भारत के प्रमुख रक्षा सहयोगियों में गिनती है। अध्ययन में इजराइल को रक्षा सहयोग के क्षेत्र में शीर्ष 3 साझेदारों में स्थान मिला है, जबकि अमेरिका और फ्रांस भी भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के तौर पर सामने आते हैं।
रक्षा सहयोग में इजराइल की मजबूत पहचान
India Israel Centre की ओर से किए गए अध्ययन में भारत के युवा वर्ग की नजर से कई देशों के साथ संबंधों को समझने की कोशिश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल की पहचान खास तौर पर रक्षा सहयोग और सैन्य क्षमता से जुड़ी हुई दिखाई देती है। इससे यह संकेत मिलता है कि Gen Z भारत की रणनीतिक साझेदारियों को केवल पारंपरिक संबंधों के आधार पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और तकनीकी जरूरतों के नजरिए से भी देख रही है।
इससे पहले मई 2026 में 18 से 29 वर्ष की उम्र के 500 शहरी भारतीयों पर किए गए एक अलग सर्वे में 48 प्रतिशत युवाओं ने इजराइल को रक्षा और सैन्य ताकत से जोड़ा था। 35 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इजराइल को इनोवेशन और तकनीक से जोड़ा, जबकि 51 प्रतिशत ने उसे तकनीकी रूप से उन्नत माना।
अमेरिका भी भारत का अहम रणनीतिक साझेदार
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों का दायरा पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों तक बढ़ा है। सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक, सूचनाओं का आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
हालांकि, सितंबर 2026 के नए Gen Z अध्ययन में युवाओं की राय केवल अमेरिका और इजराइल तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट में रूस और फ्रांस सहित भारत के अन्य प्रमुख साझेदार देशों की छवि को भी अलग-अलग क्षेत्रों में परखा गया है।
पुराने सर्वे में रूस को मिली थी अलग बढ़त
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। जून 2026 में प्रकाशित 500 शहरी युवाओं वाले सर्वे में जब पूछा गया कि आज भारत के लिए कौन सा देश सबसे अधिक मददगार है, तो रूस को 52 प्रतिशत, अमेरिका को 22 प्रतिशत और इजराइल को 14 प्रतिशत प्रतिक्रियाएं मिली थीं। यानी रक्षा सहयोग की धारणा और किसी देश को समग्र रूप से सबसे मददगार मानने की राय को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
Gen Z के लिए तकनीक और सुरक्षा अहम कसौटी
सर्वे के निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि युवा अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को देखते समय रक्षा तकनीक, सैन्य क्षमता, सुरक्षा सहयोग और रणनीतिक विश्वसनीयता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दे रहे हैं।
आज रक्षा सहयोग केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है। इसमें सैन्य तकनीक, निगरानी क्षमता, साइबर सुरक्षा, खुफिया सहयोग, प्रशिक्षण और आधुनिक रक्षा प्रणालियां भी शामिल हैं। ऐसे में तकनीकी क्षमता किसी देश की रणनीतिक उपयोगिता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत की विदेश नीति में कई देशों के साथ साझेदारी
भारत की विदेश नीति लंबे समय से किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही है। रूस, अमेरिका, इजराइल और फ्रांस भारत के रक्षा सहयोग के प्रमुख साझेदारों में शामिल रहे हैं। रक्षा सहयोग के साथ तकनीक, औद्योगिक साझेदारी और रणनीतिक हित भी इन संबंधों का हिस्सा हैं।
सर्वे के आंकड़ों को समझना भी जरूरी
नए सर्वे में Gen Z की राय को पूरे भारत की अंतिम राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अलग-अलग सर्वे में सैंपल, सवालों की भाषा, समय और सर्वे की पद्धति अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, मई 2026 के अध्ययन में 500 शहरी युवाओं को शामिल किया गया था, जबकि सितंबर में जारी अध्ययन का दायरा और सवालों का ढांचा अलग है।
इसलिए इन आंकड़ों से सबसे स्पष्ट संकेत यह मिलता है कि युवा भारतीयों के बीच विदेश नीति और रक्षा साझेदारियों को लेकर रुचि बढ़ रही है और इजराइल, अमेरिका, रूस तथा फ्रांस जैसे देशों के साथ भारत के संबंधों को वे अलग-अलग कसौटियों पर देखते हैं।

