छत्तीसगढ़ के मैनपाट को भले ही पर्यटन के लिए खास पहचान मिली हो, लेकिन यहां की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सामने आई तस्वीर चिंताजनक है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के निरीक्षण में मैनपाट सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से लेकर दवाइयों, बेड और साफ-सफाई तक कई गंभीर कमियां सामने आईं। हालात देखकर विधायक ने अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।
5 डॉक्टर पदस्थ, लेकिन 4 की दूसरे स्थानों पर ड्यूटी
अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के 5 पद भरे हुए हैं, लेकिन इनमें से 4 डॉक्टरों को दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में अटैच किया गया है। इसका सीधा असर अस्पताल आने वाले मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
नर्सिंग स्टाफ को लेकर भी ऐसी ही स्थिति सामने आई। कई नर्सों को लंबे समय से दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में अटैच किए जाने की जानकारी विधायक को दी गई। मैनपाट जैसे दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्र में स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है।
जरूरी दवाइयों की कमी ने बढ़ाई चिंता
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में जरूरी दवाइयों और जीवन रक्षक मेडिसिन की उपलब्धता भी पर्याप्त नहीं मिली। मरीजों को अस्पताल से ही जरूरी दवाइयां मिल सकें, इसके लिए पर्याप्त स्टॉक होना जरूरी है। लेकिन मौके पर दवाइयों की कमी की जानकारी सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे।
मौसमी बीमारियों के दौरान अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने पर यही कमी और बड़ी समस्या बन सकती है।
50 बेड की क्षमता, मौके पर सिर्फ 12 बेड
मैनपाट सिविल अस्पताल को 50 बेड की क्षमता वाला बताया गया है, लेकिन निरीक्षण के दौरान अस्पताल में केवल 12 बेड ही उपलब्ध मिले। इतना ही नहीं, इन बेड के लिए भी पर्याप्त चादर और बेडशीट नहीं होने की बात सामने आई।
अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के साथ मरीजों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी जरूरी है, लेकिन निरीक्षण में बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी सामने आई।
डॉक्टरों के अटैचमेंट पर भी उठे सवाल
दूरस्थ क्षेत्र के सरकारी अस्पताल से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को दूसरे स्थानों पर अटैच किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। खास बात यह है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में लंबे समय से चल रही अटैचमेंट व्यवस्था को खत्म करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद मैनपाट अस्पताल में कई कर्मचारी दूसरे स्थानों पर तैनात हैं।
विधायक ने इस व्यवस्था के कारण स्थानीय अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को लेकर अधिकारियों के सामने नाराजगी जाहिर की।
पहले भी उठ चुका है अस्पताल की व्यवस्था का मुद्दा
मैनपाट सिविल अस्पताल की समस्याएं विधायक रामकुमार टोप्पो के लिए नई नहीं हैं। इससे पहले भी विधायक अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा कर चुके हैं।
इसके बाद भी दोबारा निरीक्षण में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों का अभाव, बेड की संख्या और साफ-सफाई जैसी समस्याएं सामने आने से व्यवस्था में सुधार की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विधायक ने अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
निरीक्षण के बाद विधायक ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और अस्पताल की व्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्याप्त डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराने के साथ जरूरी दवाइयों, बेड, बेडशीट और साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर करने पर जोर दिया।
मैनपाट में माझी और पहाड़ी कोरवा समेत कई आदिवासी समुदाय निवास करते हैं। ऐसे में क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी स्थानीय आबादी के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

