देवास के एक परिवार के लिए रक्षाबंधन की खुशियां कुछ ही दिनों में मातम में बदल गईं। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार 6 जुलाई 2026 को पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में देवास के अर्पित जाज भी शामिल हैं। हादसे के बाद रविवार सुबह से अर्पित का परिवार से संपर्क टूट गया था। परिजन देर रात दिल्ली पहुंचे और घटनास्थल से लेकर अस्पतालों तक उसकी तलाश करते रहे।
सोमवार को हुई अर्पित की मौत की पुष्टि
हादसे के बाद घटनास्थल पर लगातार बचाव अभियान चलाया गया। सोमवार को अर्पित का शव मिलने की पुष्टि हुई। अर्पित देवास के कैलादेवी क्षेत्र के समीप जय बजरंग नगर का रहने वाला था और दिल्ली में रहकर बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था।
अर्पित सत्य निकेतन हॉस्टल डेज की बिल्डिंग नंबर 11 के कमरा नंबर 302 में रह रहा था। कुछ दिन पहले ही वह रक्षाबंधन का त्योहार मनाने देवास स्थित अपने घर आया था। त्योहार पूरा होने के बाद वह दिल्ली लौट गया था।
बेटे की तलाश में घटनास्थल पहुंचा परिवार
अर्पित के पिता भूपेंद्र देवास में ट्रैवल एजेंसी का संचालन करते हैं। बेटे से संपर्क नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार दिल्ली पहुंच गया। उसकी मां भी घटनास्थल पर पहुंचीं और मलबे के आसपास बेटे को तलाशती रहीं। बेटे की मौत की पुष्टि होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
कलेक्टर ने परिवार से की बातचीत
देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने अर्पित के परिवार से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अर्पित का शव बरामद कर लिया गया है और दिल्ली में ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जा रही है। पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद शव देवास लाया जाएगा।
मां ने बताया, दोपहर तक हुई थी बेटे से बात
अर्पित की मां ने बताया कि रक्षाबंधन मनाने के बाद वह एक दिन पहले ही दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। सुबह करीब 8 बजे वह पीजी पहुंचा था। परिवार ने उसे ट्रेन से दिल्ली भेजा था। दोपहर करीब 12 बजे तक अर्पित से फोन पर बातचीत भी हुई थी। इसके बाद करीब 2 बजे जब परिवार ने उसे फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया।
परिवार को लगा कि लंबी यात्रा के कारण अर्पित शायद सो गया होगा। लेकिन बाद में जब हादसे की जानकारी सामने आई और उससे संपर्क नहीं हुआ तो चिंता बढ़ गई। परिवार दिल्ली पहुंचा और लगातार उसकी जानकारी जुटाने में लगा रहा।
पीजी की स्थिति को लेकर भी उठे सवाल
परिवार के अनुसार अर्पित पिछले साल से पीजी में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता ने बताया कि जब उन्होंने पिछले वर्ष पीजी देखा था, तब वहां की स्थिति ठीक थी। बाद में वहां किसी तरह का मेंटेनेंस या निर्माण कार्य हुआ था या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। हादसे के बाद पीजी और इमारत की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

