AAP से BJP में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब की वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। चड्ढा का कहना है कि उनका नाम केवल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाया गया और इसके पीछे राजनीतिक दबाव काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP नेतृत्व का उन अधिकारियों पर प्रभाव है जो मतदाता सूची तैयार करने और श्रेणी से जुड़ी जांच का काम करते हैं।हालांकि AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट चुनाव आयोग जारी करता है। पार्टी के मुताबिक मतदाता सूची में किसी का नाम जोड़ने या हटाने में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।
चड्ढा बोले – अधिकारियों पर सरकार के दबाव का डर
राघव चड्ढा ने द ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि फिलहाल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है और अक्टूबर में अंतिम सूची जारी होनी है।उनका दावा है कि चुनावी ड्यूटी पूरी होने के बाद अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर से जुड़े फैसलों में राज्य सरकार की भूमिका होने के कारण उन पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है।
AAP छोड़ने के बाद बदले की कार्रवाई का लगाया आरोप
चड्ढा ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी छोड़कर BJP में शामिल होने के बाद उन्हें और अन्य सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए पंजाब सरकार और AAP नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए।उनके मुताबिक पार्टी छोड़ने के बाद AAP नेतृत्व उनसे नाराज है और पुलिस तथा प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल उन लोगों के खिलाफ किया जा रहा है, जिन्होंने पार्टी के खिलाफ आवाज उठाई।
वोटर ID को दिल्ली ट्रांसफर करने के आरोप पर दी सफाई
राघव चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका वोटर ID मोहाली में पंजीकृत था और वह इसे दिल्ली स्थानांतरित कराने की कोशिश नहीं कर रहे थे। उन्होंने इस संबंध में AAP की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया।चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के लिए बनाए गए प्रोटेक्टेड लिस्ट संबंधी प्रावधान के तहत उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए था।
ECI की गाइडलाइन का भी दिया हवाला
चड्ढा के अनुसार, चुनाव आयोग की गाइडलाइंस में न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर बैठे लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल तथा जनसेवा जैसे क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के नामों को लेकर विशेष प्रावधान हैं।इन पहले से चिन्हित नामों को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल करने का उद्देश्य यह है कि दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान जरूरी दस्तावेज जुटाए जा सकें।चड्ढा का आरोप है कि उनके मामले में इस प्रावधान का जानबूझकर पालन नहीं किया गया। हालांकि अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर में जारी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

