राजनांदगांव में करीब नौ साल पुराने गोलीकांड मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने 28 सितंबर को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए नितीन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली, दिनेश कुमार माहेश्वरी उर्फ मोलू मारवाड़ी और भरत साहू को दोषी ठहराया।मामले में एक अन्य आरोपी विनोद यादव के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया।
पेशी से लौट रहे युवक पर बीच रास्ते में चली थी गोली
अभियोजन के मुताबिक घटना 21 नवंबर 2016 की है। घनश्याम विश्वकर्मा अपने साथी दीपक राजपूत के साथ अदालत में पेशी के बाद मोटरसाइकिल से वापस लौट रहे थे। शाम करीब 4.15 बजे दोनों इंदिरा नगर चौक के पास पहुंचे थे।इसी दौरान नितीन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा। अभियोजन ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने घनश्याम विश्वकर्मा की हत्या की साजिश रची थी। इसके बाद मुंकू नेपाली ने कथित तौर पर देशी कट्टे से घनश्याम पर गोली चला दी।
कंधे के पीछे लगी गोली, अस्पताल में कराया गया था भर्ती
फायरिंग में गोली घनश्याम विश्वकर्मा के दाहिने कंधे के पीछे लगी। वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।घटना के बाद मामले में आरोपी बनाए गए मुंकू नेपाली और मोलू मारवाड़ी फरार हो गए थे। जांच और सुनवाई की प्रक्रिया के बाद यह मामला अदालत तक पहुंचा, जहां अब करीब नौ साल बाद फैसला आया है।
मुंकू नेपाली को हत्या के प्रयास और हथियार रखने के मामले में सजा
अदालत ने नितीन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 और 120-बी/34 के तहत दो अलग-अलग मामलों में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों मामलों में पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक मामले में तीन महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा आयुध अधिनियम की धारा 25(1-बी)ए के तहत एक वर्ष और धारा 27 के तहत सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई गई है।
मोलू मारवाड़ी और भरत साहू को भी उम्रकैद
दिनेश कुमार माहेश्वरी उर्फ मोलू मारवाड़ी और भरत साहू को भी अदालत ने हत्या के प्रयास और साजिश से जुड़ी धाराओं में दोषी माना। दोनों को धारा 307/34 और 120-बी/34 के तहत सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी गई है।दोनों पर प्रत्येक मामले में पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड नहीं भरने पर तीन-तीन महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
एक आरोपी को अदालत ने किया दोषमुक्त
मामले में आरोपी बनाए गए विनोद यादव को अदालत से राहत मिली। उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं कर सका। इसके चलते अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया।मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला लोक अभियोजक राजेश खांडेकर और अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार बाजपेयी ने पैरवी की।

