रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस घटना को गंभीर बताते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की है।
दिग्विजय सिंह का कहना है कि अस्पताल में हुई घटना बेहद चिंताजनक है और जिम्मेदारी तय होने तक कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी। उन्होंने रीवा में कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन शुरू करने की भी बात कही है।
न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कल्पना मिश्रा को न्याय मिलने तक कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी निशाना साधा।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग दिग्विजय सिंह पहले भी कर चुके हैं। अक्टूबर 2025 में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में भी उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
पांचवें दिन भी पिता का आमरण अनशन जारी
इधर, बेटी कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पिता रामशिरोमणि मिश्रा का आमरण अनशन जारी है। रविवार को उनके अनशन का पांचवां दिन रहा। वे रीवा के सिरमौर चौराहे पर धरने पर बैठे हैं।
परिजनों की प्रमुख मांग है कि प्रसूता और नवजात की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारियों पर कार्रवाई
मामले में अब तक चार स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें दो नर्सिंग अधिकारी और दो डॉक्टर शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ड्यूटी डॉक्टर सोनल अग्रवाल तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. निधि पांडे को निलंबित किया गया है।
घटना की जांच के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की गई हैं। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि कल्पना मिश्रा के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उनकी मौत तक उपचार की प्रक्रिया क्या रही, किन स्तरों पर लापरवाही हुई और इलाज के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया या नहीं।
जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
अस्पताल प्रशासन और जांच समितियों की रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। वहीं राजनीतिक दबाव और परिवार के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच यह मामला अब रीवा से निकलकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर व्यापक बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।

