भारत में शादी के बाद बेटी के ससुराल जाने की परंपरा सदियों पुरानी है। लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां इसका बिल्कुल अलग चलन देखने को मिलता है। यहां शादी के बाद दामाद अपने ससुराल में आकर रहने लगते हैं और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं। भटौली गांव में यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
80 फीसदी घरों में रहते हैं दामाद
विदिशा जिले के सिरोंज जनपद मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित भटौली गांव अपनी इसी अनोखी परंपरा के कारण चर्चा में रहता है। गांव में करीब 100 परिवार रहते हैं और आबादी लगभग 650 बताई जाती है।
बताया जाता है कि गांव के करीब 80 प्रतिशत परिवारों में शादी के बाद दामाद ससुराल में ही रहकर घर की जिम्मेदारी संभालते हैं। खास बात यह है कि यह परंपरा किसी दबाव के कारण नहीं, बल्कि परिवारों की सहमति से निभाई जाती है।
तीन पीढ़ियों से कायम है रिवाज
भटौली में दामाद के घर जमाई बनने की परंपरा की जड़ें करीब तीन पीढ़ी पुरानी बताई जाती हैं। इसकी शुरुआत बुद्धा चौकीदार के परिवार से जुड़ी मानी जाती है। उनकी बेटी सुमित्रा बाई की शादी गडरू नाम के व्यक्ति से हुई थी, जिसके बाद गडरू भटौली में ही रहने लगे।
इसके बाद गडरू की बेटी केराबाई की शादी हीरालाल से हुई और वह भी इसी परिवार के साथ रहने लगे। इस तरह एक ही परिवार में लगातार तीन पीढ़ियों तक दामादों के ससुराल में रहकर परिवार संभालने का सिलसिला जारी रहा।
गांव में कुछ परिवार ऐसे भी बताए जाते हैं, जहां एक ही घर में दो दामाद घर जमाई बनकर रह रहे हैं।
जाति तक सीमित नहीं है परंपरा
भटौली की यह परंपरा किसी एक समुदाय या जाति तक सीमित नहीं है। गांव में पंडित, रघुवंशी, कुशवाह और आदिवासी समाज के परिवारों में भी दामादों के ससुराल में रहने की परंपरा देखने को मिलती है।
गांव की धार्मिक व्यवस्था में भी इसका असर दिखाई देता है। बताया जाता है कि यहां के मंदिर की पूजा और देखरेख की जिम्मेदारी भी एक दामाद संभाल रहे हैं। यही वजह है कि भटौली का यह रिवाज सामान्य शादी की परंपराओं से अलग होकर गांव की पहचान का हिस्सा बन चुका है।

