नई दिल्ली। साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से हुई छह मौतों के बाद दिल्ली नगर निगम ने आसपास की जर्जर इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को हुए हादसे ने घनी आबादी वाले इस छात्र क्षेत्र में इमारतों की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। अब प्रशासन का ध्यान इस बात पर है कि आसपास मौजूद किसी दूसरी कमजोर इमारत के कारण दोबारा जानमाल का नुकसान न हो। इसी क्रम में MCD ने दुर्घटनाग्रस्त भवन के आसपास स्थित खतरनाक मकानों की जांच शुरू कर दी है।
बगल की इमारत को घोषित किया खतरनाक
MCD ने सत्य निकेतन के मकान नंबर 13 को खतरनाक घोषित करते हुए वहां आधिकारिक नोटिस चस्पा किया है। निगम ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 की धारा 348 और धारा 491 के तहत कार्रवाई की है।
निगम के अनुसार इमारत की मौजूदा स्थिति बेहद खराब है और इसके कारण उसमें रहने वाले लोगों के साथ राहगीरों की सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है।
मालिक को मिला 3 दिन का समय
निगम ने संपत्ति मालिक को नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर इमारत को स्वयं गिराने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर MCD अपने स्तर पर भवन को ध्वस्त करेगी।
ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च भी संपत्ति मालिक से बकाया कर के तौर पर वसूल किए जाने की बात कही गई है। यानी आदेश की अनदेखी करने पर मालिक को आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ेगा।
मलबे में जिंदगी तलाश रही NDRF की टीम
हादसे के बाद NDRF की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। मलबे के भीतर किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना तलाशने के लिए प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स की सहायता ली जा रही है।
बचावकर्मी आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने के साथ संदिग्ध स्थानों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। दिल्ली दमकल सेवा, पुलिस, NDRF और मेडिकल टीमें भी मौके पर तैनात हैं।
पीजी के किराये और सुविधाओं पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद पीजी में रहने वाले छात्रों से लिए जाने वाले किराये और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, हादसे वाली पांच मंजिला इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे।
बताया गया है कि प्रति छात्र प्रति बेड करीब 12 हजार रुपए किराया लिया जाता था। यहां दूसरे राज्यों से आए छात्र रह रहे थे, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे।
अब जांच में यह भी देखा जा सकता है कि इतनी अधिक किराया राशि लेने के बावजूद भवन का रखरखाव, संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों को लेकर पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं।
पुरानी इमारतों का होगा सुरक्षा ऑडिट
छह मौतों वाले इस हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की पुरानी और बहुमंजिला इमारतों पर निगरानी बढ़ा दी है। इलाके में ऐसी इमारतों की पहचान कर उनकी स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
MCD और स्थानीय प्रशासन का लक्ष्य संवेदनशील भवनों की समय रहते पहचान करना है। जांच में किसी इमारत को असुरक्षित पाए जाने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सत्य निकेतन हादसे ने व्यवस्था के सामने खड़े किए बड़े सवाल
एक पुरानी बहुमंजिला पीजी इमारत के अचानक ढहने से छह लोगों की मौत के बाद अब केवल राहत और जांच ही नहीं, बल्कि दिल्ली के छात्र इलाकों में चल रहे पीजी और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में MCD की जांच और कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इलाके में कितनी इमारतें सुरक्षा के लिहाज से जोखिम वाली पाई जाती हैं।

