शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई इलाके में इस्तेमाल की जा रही एंटी-हेल गन को लेकर अहम आदेश दिया है। अदालत ने क्षेत्र में ऐसी गनों के संचालन पर कम से कम एक साल तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को देवरीघाट और बड़ौनघाट में लगी दोनों एंटी-हेल गनों को तत्काल बंद कराने को कहा है।
निजी तौर पर एंटी-हेल गन चलाने पर भी रोक
हाईकोर्ट ने केवल सरकारी स्तर पर संचालित गनों को बंद करने का निर्देश नहीं दिया है, बल्कि निजी लोगों द्वारा एंटी-हेल गन के इस्तेमाल पर भी रोक सुनिश्चित करने को कहा है। अदालत का यह आदेश मुख्य रूप से इस आशंका को देखते हुए आया है कि इन गनों के इस्तेमाल का आसपास के इलाकों में मौसम के स्वरूप पर प्रभाव पड़ सकता है।
बादलों की दिशा और बारिश पर असर की आशंका
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले को गंभीरता से लिया। अदालत के सामने पेश किए गए रिकॉर्ड में आशंका जताई गई कि एंटी-हेल गन चलाने के बाद बादलों की दिशा प्रभावित हो सकती है। इससे आसपास के दूसरे क्षेत्रों में अधिक बारिश या ओलावृष्टि होने की संभावना को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन पूरा होने तक एहतियाती कदम
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि एंटी-हेल गन की तकनीक के संभावित प्रभावों को समझने के लिए डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी में अध्ययन चल रहा है। हालांकि अदालत ने माना कि इस अध्ययन से ठोस और निर्णायक निष्कर्ष आने में अभी कई साल लग सकते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक प्रमाण स्पष्ट होने तक एहतियात के तौर पर गनों का इस्तेमाल रोकना उचित माना गया।
गन बंद होने के बाद बागानों पर असर की मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार से यह भी जानकारी मांगी है कि एंटी-हेल गन का संचालन बंद किए जाने के बाद आसपास के बागानों और अन्य क्षेत्रों में मौसम तथा फसल पर क्या प्रभाव देखने को मिला। अदालत इस जानकारी के जरिए यह समझना चाहती है कि इस तकनीक के इस्तेमाल और उसके बंद होने के बीच कोई प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देता है या नहीं।
नौणी विश्वविद्यालय को भी बनाया गया पक्षकार
मामले की सुनवाई के दौरान डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी को भी पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने रजिस्ट्रार के माध्यम से विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
विदेशों में एंटी-हेल गन के इस्तेमाल का भी होगा अध्ययन
याचिका में मेक्सिको और रोमानिया सहित कुछ अन्य देशों में एंटी-हेल गन के संभावित प्रभावों का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार को इन देशों के अनुभवों के साथ तकनीक से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
8 दिसंबर को फिर होगी सुनवाई
एंटी-हेल गन का इस्तेमाल हिमाचल के सेब उत्पादक क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसल बचाने के लिए किया जाता है। हालांकि अब इसके संभावित मौसम और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक जांच पर जोर दिया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।

