अगर गर्दन, कंधे, पीठ या कमर में बार-बार दर्द रहता है, तो इसकी वजह सिर्फ गलत तरीके से सोना नहीं हो सकती। रोजमर्रा की कई छोटी आदतें भी धीरे-धीरे बॉडी पोश्चर को प्रभावित करती हैं। खराब पोश्चर न केवल शरीर में दर्द बढ़ाता है, बल्कि रीढ़, मांसपेशियों और जोड़ों पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है। अच्छी बात यह है कि समय रहते इन आदतों में बदलाव करके इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।
मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल
लंबे समय तक सिर झुकाकर मोबाइल देखने से गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे टेक्स्ट नेक की समस्या भी कहा जाता है।
क्या करें
- मोबाइल को आंखों की ऊंचाई पर रखें।
- हर 20 से 30 मिनट में गर्दन को आराम दें।
- हल्की स्ट्रेचिंग की आदत डालें।
घंटों तक लगातार बैठे रहना
ऑफिस या घर में बिना ब्रेक लिए लंबे समय तक बैठने से रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित होती है और कमर व कंधों में दर्द शुरू हो सकता है।
क्या करें
- हर 30 से 45 मिनट में कुछ मिनट टहलें।
- बैठते समय दोनों पैर जमीन पर रखें।
- कमर को कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें।
लैपटॉप या कंप्यूटर की गलत पोजिशन
अगर स्क्रीन बहुत नीचे या ऊपर है तो गर्दन लगातार झुकती या उठी रहती है, जिससे पोश्चर खराब हो सकता है।
क्या करें
- स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आंखों के बराबर रखें।
- कीबोर्ड ऐसी ऊंचाई पर रखें कि कोहनी लगभग 90 डिग्री के कोण पर रहे।
- स्क्रीन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
एक कंधे पर भारी बैग टांगना
रोजाना एक ही कंधे पर भारी बैग रखने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और रीढ़ पर असमान दबाव पड़ता है।
क्या करें
- दोनों स्ट्रैप वाला बैकपैक इस्तेमाल करें।
- बैग का वजन जरूरत से ज्यादा न रखें।
- एक ही कंधे पर लंबे समय तक बैग न लटकाएं।
सोने की गलत आदतें
बहुत ऊंचा या बहुत नीचा तकिया और खराब गद्दा भी शरीर की प्राकृतिक मुद्रा को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या करें
- ऐसा तकिया चुनें जो गर्दन को सही सहारा दे।
- बहुत नरम या धंसे हुए गद्दे से बचें।
- पीठ के बल या करवट लेकर सोने की कोशिश करें।
शारीरिक गतिविधि की कमी
कमजोर मांसपेशियां शरीर को सही मुद्रा में बनाए रखने में मदद नहीं कर पातीं।
क्या करें
- रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
- योग, स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को दिनचर्या में शामिल करें।
- प्लैंक, ब्रिज और बैक स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती हैं।
गलत तरीके से खड़े रहना
एक पैर पर ज्यादा वजन डालकर खड़े रहना या कंधे झुकाकर चलना भी पोश्चर को खराब करता है।
क्या करें
- दोनों पैरों पर समान वजन रखें।
- कंधे सीधे और आरामदायक स्थिति में रखें।
- ठुड्डी को जमीन के समानांतर रखें।
तनाव का भी पड़ता है असर
मानसिक तनाव के दौरान लोग अनजाने में कंधे सिकोड़ लेते हैं या झुककर बैठते हैं, जिससे मांसपेशियों में जकड़न बढ़ सकती है।
क्या करें
- गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।
- पर्याप्त नींद लें।
- योग और मेडिटेशन को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
गलत जूते पहनना
बहुत ऊंची हील या असुविधाजनक जूते शरीर का संतुलन बिगाड़ सकते हैं और कमर व घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
क्या करें
- आरामदायक और सही फिटिंग वाले जूते पहनें।
- लंबे समय तक ऊंची हील पहनने से बचें।
अच्छी बॉडी पोश्चर के फायदे
- गर्दन, पीठ और कमर दर्द का खतरा कम होता है।
- रीढ़ और जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है।
- सांस लेने में आसानी होती है।
- शरीर का संतुलन बेहतर रहता है।
- व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में सुधार दिखाई देता है।
कब डॉक्टर से सलाह लें
अगर गर्दन, पीठ या कंधों में दर्द लंबे समय तक बना रहे, हाथों में झनझनाहट महसूस हो या दर्द लगातार बढ़ता जाए, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है। लगातार बना रहने वाला दर्द किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

