दिल्ली : जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों की बात गंभीरता से सुनने और उनसे सीधे संवाद करने की अपील की है।
‘छात्रों का व्यवस्था से विश्वास डगमगा चुका है’
प्रियंका गांधी ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं, क्योंकि उनका मौजूदा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ गया है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक फैसले लेने से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि सरकार को छात्रों के साथ बैठकर उनकी चिंताओं का समाधान तलाशना होगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगों का किया जिक्र
कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह समय नेतृत्व दिखाने का है और सरकार को छात्रों की आवाज को नजरअंदाज करने के बजाय गंभीरता से सुनना चाहिए।
सरकार पर लगाया दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार छात्रों पर भरोसा जताने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर उनके विरोध प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है, तो उन्हें बातचीत के लिए बुलाना चाहिए और उनकी बात सुननी चाहिए।
उदाहरण देकर समझाई संवाद की जरूरत
अपनी बात को स्पष्ट करते हुए प्रियंका गांधी ने एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा अपने पिता से कहे कि वह डिजाइनर बनना चाहता है, लेकिन पिता उसकी इच्छा सुने बिना इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला तय कर दें, तो यह उसकी बात को अनसुना करने जैसा होगा। उनका कहना था कि छात्रों के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।
‘विश्वास बहाल करने के लिए ठोस पहल जरूरी’
प्रियंका गांधी ने कहा कि कई बार नेताओं को अपनी राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर जनता की भावनाओं को समझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार को उनका भरोसा दोबारा जीतने के लिए सार्थक संवाद और ठोस कदम उठाने चाहिए।

