रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाली पीएम-स्वनिधि योजना का विस्तार अब बड़े स्तर पर किया जा रहा है। केंद्र सरकार इस योजना को चरणबद्ध तरीके से शहरों से आगे बढ़ाकर जनगणना वाले कस्बों और शहरी बाहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, इस योजना ने छोटे विक्रेताओं को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के साथ उनकी आय, डिजिटल भुगतान और जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने लोकसभा में लिखित जवाब के माध्यम से दी।
योजना से कारोबार में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ा लाभ
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद की ओर से किए गए अध्ययन में योजना के प्रभाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। वर्ष 2023 में किए गए सर्वे में देश के 100 शहरी स्थानीय निकायों के 5 हजार से अधिक लाभार्थियों को शामिल किया गया था।अध्ययन में पाया गया कि 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए पीएम-स्वनिधि से मिला ऋण उनका पहला बैंक ऋण था। उन्होंने इस राशि का इस्तेमाल अपने कारोबार को बढ़ाने में किया।वर्ष 2025 में किए गए अध्ययन में सामने आया कि 2023 से 2025 के बीच योजना से जुड़े लाभार्थियों के औसत वार्षिक व्यापार लाभ में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रहे छोटे व्यापारी
मंत्रालय के अनुसार, पीएम-स्वनिधि योजना केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छोटे कारोबारियों का क्रेडिट इतिहास तैयार करने में भी मदद कर रही है।अध्ययन में सामने आया कि सभी ऋण चक्रों में करीब 30 प्रतिशत लाभार्थियों के पास पीएम-स्वनिधि के अलावा अन्य औपचारिक ऋण भी उपलब्ध हैं। इससे संकेत मिलता है कि स्ट्रीट वेंडर्स अब धीरे-धीरे नियमित बैंकिंग व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।
डिजिटल भुगतान अपनाने में आई तेजी
योजना के माध्यम से डिजिटल लेनदेन को भी बढ़ावा मिला है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच लाभार्थियों में डिजिटल भुगतान की आदत तेजी से बढ़ी है।शहरी स्थानीय निकायों की ओर से डिजिटल साक्षरता शिविर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को कैशबैक जैसी प्रोत्साहन सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी हुआ सुधार
पीएम-स्वनिधि योजना का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा है। अध्ययन के अनुसार, आसान ऋण सुविधा मिलने से परिवारों की आय और खर्च में स्थिरता आई है।इससे बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और बच्चों की शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।
यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू
सरकार ने योजना के तहत दूसरी ऋण किश्त का भुगतान कर चुके लाभार्थियों के लिए यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू की है।23 जनवरी 2026 से शुरू हुई इस पहल के तहत 12 जुलाई 2026 तक कटनी में 14, पन्ना में 2 और खजुराहो में 1 क्रेडिट कार्ड जारी किया जा चुका है।
हर पात्र स्ट्रीट वेंडर को मिलेगा लाभ
पीएम-स्वनिधि योजना में मौसमी विक्रेता, घूम-घूमकर सामान बेचने वाले, महिला विक्रेता और पर्यटन क्षेत्रों में काम करने वाले विक्रेता भी शामिल हैं।लाभार्थियों का चयन स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम 2014 के तहत राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किए गए सर्वे के आधार पर किया जाता है।
जागरूकता अभियान से बढ़ाई जा रही पहुंच
योजना को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार रेडियो, टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रही है। स्थानीय भाषाओं में भी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।इसके अलावा राज्यों, नगर निकायों और बैंकों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। वर्ष 2025 और 2026 में लोक कल्याण मेले, विशेष अभियान और स्वनिधि महोत्सव के जरिए नए लाभार्थियों को जोड़ने और ऋण प्रक्रिया को तेज करने का काम किया गया।
स्ट्रीट फूड हब विकसित करने की भी तैयारी
मंत्रालय ने पीएम-स्वनिधि योजना के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए स्ट्रीट फूड हब विकसित करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित, व्यवस्थित और आकर्षक बिक्री स्थल तैयार करना है, ताकि छोटे खाद्य विक्रेताओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और आम लोगों व पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव मिले।

