देश : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने इसे छात्रों के हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर भरोसे का संकेत बताया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मुलाकात के बाद सरकार की ओर से परीक्षा सुधार और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई को लेकर कई बयान सामने आए।
जितेंद्र सिंह बोले- छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ सोनम वांगचुक से मुलाकात कर छात्रों की चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने सकारात्मक संवाद और ठोस पहल का भरोसा दिलाया, जिसके बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार छात्रों को न्याय दिलाने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
किशन रेड्डी ने कहा- युवाओं का विश्वास मजबूत हुआ
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त करने का फैसला इस बात का संकेत है कि उन्हें छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भरोसा है।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में देश के युवाओं की आकांक्षाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं और जो भी उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पीयूष गोयल ने दोहराया सरकार का रुख
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने वांगचुक से मुलाकात कर सरकार की ओर से छात्रों की चिंताओं के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद उनका अनशन समाप्त करने का फैसला सरकार की नीयत और प्रतिबद्धता में विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए जरूरी सुधार लागू किए जाएंगे।
रेखा गुप्ता ने कहा- संसद में भी होगी सार्थक चर्चा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधारों के साथ-साथ संसद में भी इस विषय पर व्यापक चर्चा कर समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।

