नई दिल्ली। केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित तकनीकों का तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार का कहना है कि किसान परामर्श, कीट नियंत्रण, फसल पहचान, बीमा सेवाओं, सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण और कृषि प्रशासन से जुड़े विश्लेषण में एआई का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि डिजिटल कृषि मिशन के तहत राज्यों को एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।
एआई से होगी फसलों की बेहतर सुरक्षा
सरकार के अनुसार राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली एआई और मशीन लर्निंग की मदद से फसलों में कीटों के हमले का समय रहते पता लगाने में सहायता कर रही है। इस प्रणाली का उपयोग फिलहाल 10 हजार से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ता कर रहे हैं।यह प्लेटफॉर्म 73 प्रकार की फसलों और 436 प्रकार के कीटों की निगरानी करने में सक्षम है। किसान कीट की तस्वीर अपलोड कर तुरंत विशेषज्ञों से सलाह भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे फसल नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।
मौसम की सटीक जानकारी से करोड़ों किसानों को फायदा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग एआई आधारित मौसम और मानसून पूर्वानुमान उपलब्ध करा रहा है। स्थान आधारित मौसम सलाह के जरिए किसानों को बुवाई, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।सरकार के मुताबिक अब तक करीब 5.28 करोड़ किसान इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं।
‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म बना किसानों का डिजिटल साथी
केंद्र सरकार का ‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म कृषि क्षेत्र के लिए एआई आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया गया है। यह किसानों को वास्तविक समय में कृषि सलाह, सरकारी योजनाओं की जानकारी और विभिन्न कृषि सेवाएं उपलब्ध कराता है।सरकार के अनुसार इस प्लेटफॉर्म से अब तक 3 लाख से अधिक किसानों को सीधे सेवाएं मिली हैं, जबकि 72 लाख से ज्यादा किसान प्रश्नों का समाधान किया जा चुका है।इसके माध्यम से केंद्र सरकार की 18 योजनाओं की जानकारी, फसल और पशुपालन संबंधी सलाह, मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव, कीट एवं रोग पहचान, मृदा स्वास्थ्य संबंधी सुझाव और शिकायत निवारण जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
10 भाषाओं में मिल रही डिजिटल सेवाएं
‘भारत विस्तार’ वेब पोर्टल, मोबाइल एप, एआई चैटबॉट और समर्पित टेलीफोन सेवा के माध्यम से उपलब्ध है। टेलीफोन सेवा फिलहाल हिंदी और अंग्रेजी में संचालित हो रही है, जबकि वेब पोर्टल, मोबाइल एप और चैटबॉट के जरिए 10 भाषाओं में सेवाएं दी जा रही हैं।
डिजिटल कृषि पर लगातार बढ़ रहा निवेश
सरकार ने बताया कि डिजिटल कृषि कार्यक्रमों के लिए पिछले कुछ वर्षों में बजट में लगातार बढ़ोतरी की गई। वर्ष 2022-23 में 60 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, जो बाद के वर्षों में बढ़कर 2024-25 में 763.88 करोड़ रुपए तक पहुंच गए। इसके बाद भी डिजिटल कृषि परियोजनाओं के लिए लगातार सैकड़ों करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।सरकार के अनुसार इन योजनाओं पर आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा तकनीकी विकास, डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्षमता निर्माण और राज्यों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर खर्च किया गया है।
राज्यों को भी मिल रही पूरी सहायता
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को डिजिटल कृषि परियोजनाओं के सफल संचालन के लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों सहित सभी किसानों तक एआई आधारित कृषि सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
एआई के असर का अलग अध्ययन अभी नहीं
सरकार ने यह भी बताया कि एआई आधारित कृषि तकनीकों के प्रभाव का अलग से कोई व्यापक मूल्यांकन फिलहाल नहीं किया गया है। हालांकि डिजिटल कृषि मिशन के तहत इन तकनीकों का विस्तार लगातार किया जा रहा है और भविष्य में इनके दायरे को और बढ़ाने की योजना है।

