नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को रोमानिया की बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि शिक्षा उनके जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन लाने वाली शक्ति रही है। उनके अनुसार, शिक्षा समाज में समान अवसर उपलब्ध कराने का सबसे प्रभावी माध्यम है और यह किसी व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और आगे बढ़ने के संकल्प को महत्व देती है।
अपने संघर्षों का किया जिक्र
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका जन्म सीमित संसाधनों वाले एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने कहा कि वह अपने गांव से कॉलेज पहुंचने वाली पहली लड़की थीं।उन्होंने कहा कि इस सफर ने उन्हें यह सिखाया कि शिक्षा ही सबसे बड़ा समानता का माध्यम है। शिक्षा यह नहीं देखती कि कोई कहां पैदा हुआ है, बल्कि यह अवसर देती है कि व्यक्ति अपनी मेहनत के दम पर कितनी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
सम्मान को भारत-रोमानिया मित्रता का प्रतीक बताया
राष्ट्रपति मुर्मु को शिक्षा, जनसेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में योगदान के लिए विश्वविद्यालय के सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने विश्वविद्यालय के रेक्टर, सीनेट और पूरे शैक्षणिक समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह यह सम्मान 1.4 अरब भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर रही हैं।उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत और रोमानिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का भी प्रतीक है।
शिक्षक जीवन की यादें भी साझा कीं
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने शिक्षक के रूप में बिताए दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक साधारण कक्षा भी किसी छात्र, उसके परिवार और पूरे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती है।उनके अनुसार, शिक्षा का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सकारात्मक असर पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों पर दिखाई देता है।
एआई के दौर में नैतिक मूल्यों को बताया जरूरी
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि वैज्ञानिक प्रगति मानवता के हित में उपयोगी साबित हो सके।
शिक्षा को बताया समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और समान अवसरों का आधार है। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से हर व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

