नई दिल्ली। रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में आयोजित एक विशेष समारोह में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा, शोध और वैश्विक सहयोग को मानवता के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताते हुए भारत और रोमानिया के शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया।
संयुक्त शोध और अकादमिक साझेदारी पर दिया जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी और रोमानिया के अन्य शिक्षण संस्थानों से संयुक्त शोध परियोजनाओं, छात्र और शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रमों तथा अकादमिक सहयोग को विस्तार देने की अपील की।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग नवाचार को गति देगा और ज्ञान के नए आयाम स्थापित करेगा।
एआई के दौर में नैतिक मूल्यों को बताया अनिवार्य
राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीकों और वैज्ञानिक प्रगति के नए दौर में प्रवेश कर रही है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह सकती।उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी प्रगति के साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व मिले, ताकि विज्ञान का लाभ पूरी मानवता तक पहुंचे।
शिक्षा को बताया समाज परिवर्तन की सबसे मजबूत शक्ति
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील समाज की सबसे मजबूत नींव है।अपने शिक्षक जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक साधारण कक्षा भी किसी विद्यार्थी, उसके परिवार और पूरे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मकता और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने की सोच पर आधारित है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है।
भारत और रोमानिया के ऐतिहासिक संबंधों की दिलाई याद
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत और रोमानिया के लंबे सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों पुराना बौद्धिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है।उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1926 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने बुखारेस्ट के नेशनल थिएटर में मानवता की एकता पर व्याख्यान दिया था। वहीं रोमानिया के राष्ट्रीय कवि मिहाई एमिनेस्कु ने अपने छात्र जीवन में उपनिषदों और भगवद्गीता का अध्ययन किया था, जिसका उनके साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा।
रोमानिया के प्रधानमंत्री से भी हुई अहम मुलाकात
सम्मान समारोह से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुखारेस्ट स्थित विक्टोरिया पैलेस में रोमानिया के प्रधानमंत्री इली बोलोजान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, कनेक्टिविटी, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य द्विपक्षीय क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
रिश्तों को नई ऊंचाई देने का दिया संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास जताया कि शिक्षा, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग भारत और रोमानिया के संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों के बीच गहरी साझेदारी भविष्य की पीढ़ियों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

