लाइफस्टाइल : भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया आज दुनिया के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सही समय पर जीवनशैली और आसपास के माहौल में जरूरी बदलाव किए जाएं तो डिमेंशिया के करीब 45 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है या लंबे समय तक टाला जा सकता है।WHO ने डिमेंशिया से बचाव को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इनका उद्देश्य लोगों को उन आदतों और उपायों के बारे में जागरूक करना है, जिनकी मदद से दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
दुनिया भर में बढ़ रहा है बीमारी का असर
डिमेंशिया ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है।आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में 5.7 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। हर साल लगभग एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। भारत में भी 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के करीब 88 लाख लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं।
प्रदूषित हवा भी बढ़ा सकती है जोखिम
WHO ने पहली बार वायु प्रदूषण को डिमेंशिया के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया है। लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है।
इन आदतों से दिमाग को रखें मजबूत
WHO के अनुसार, कुछ स्वस्थ आदतों को अपनाकर डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है।इसके लिए धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना जरूरी है। इसके अलावा पौष्टिक और संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि बनाए रखना और परिवार व दोस्तों के साथ सामाजिक रूप से जुड़े रहना फायदेमंद हो सकता है।दिमाग को सक्रिय रखने के लिए पढ़ने, नई चीजें सीखने और मानसिक गतिविधियों में हिस्सा लेने जैसी आदतें भी मददगार साबित हो सकती हैं।
बिना विशेषज्ञ सलाह के न लें सप्लीमेंट
कई लोग दिमाग की सेहत बेहतर रखने के लिए खुद से विटामिन या ओमेगा-3 जैसे सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं। WHO का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसे सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि डिमेंशिया की रोकथाम में इनके प्रभाव को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, डिमेंशिया से बचाव के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय स्वस्थ जीवनशैली, बेहतर खानपान, मानसिक सक्रियता और साफ वातावरण पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है।

