देश : केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। जिम्मेदारी मिलते ही उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर विभाग के प्रमुख मुद्दों और आगामी योजनाओं पर चर्चा की।प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लगातार बहस जारी है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिला अतिरिक्त प्रभार
राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मौजूदा कामकाज, प्राथमिकताओं और लंबित विषयों की जानकारी ली। शिक्षा मंत्रालय देश की भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है, ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा सुधारों पर रहेगा फोकस
प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी तरीके से लागू करना शामिल है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और शोध के क्षेत्र में नए अवसर तैयार करना भी अहम चुनौतियां रहेंगी।विशेषज्ञों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि नई जिम्मेदारी के तहत मंत्रालय डिजिटल शिक्षा, तकनीक आधारित शिक्षण और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ता है।
अनुभवी नेता के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी को संगठन और प्रशासनिक अनुभव वाला नेता माना जाता है।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना होगी बड़ी चुनौती
शिक्षा मंत्रालय संभालने के बाद उनके सामने सबसे अहम चुनौती प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना होगी। छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसा कायम करना मंत्रालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में शोध को बढ़ावा देना, शिक्षा में तकनीक का विस्तार करना और रोजगार से जुड़ी कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनके एजेंडे में अहम रहेगा।
आने वाले दिनों में दिखेगी मंत्रालय की नई दिशा
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही प्रह्लाद जोशी ने विभागीय कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में परीक्षा सुधार, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, उच्च शिक्षा में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की ओर से नए कदम उठाए जा सकते हैं।अब शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की नजर इस बात पर होगी कि प्रह्लाद जोशी इन चुनौतियों का सामना किस रणनीति के साथ करते हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।

