नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गई है। सोमवार को शीर्ष अदालत इस मुद्दे से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर सकती है। याचिकाओं में प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित बल प्रयोग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ करेगी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने 24 जुलाई को इस मामले पर 27 जुलाई को सुनवाई करने के लिए सहमति दी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने मामले का उल्लेख करते हुए अदालत से कहा था कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और इस पर न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है।
मीडिया रिपोर्टों पर अदालत ने जताई थी नाराजगी
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कुछ मीडिया रिपोर्टों पर कड़ी आपत्ति भी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि उस समय इस मुद्दे पर कोई औपचारिक याचिका दायर ही नहीं की गई थी। केवल एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया था, इसलिए यह कहना कि अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया, पूरी तरह गलत और गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग थी।
याचिका में एफआईआर दर्ज करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के संबंधित कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। आरोप है कि जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया गया।
आंदोलन खत्म होने के बाद भी जारी है कानूनी लड़ाई
नीट पेपर लीक को लेकर चला छात्र आंदोलन 36 दिनों तक जारी रहा। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया जारी है और इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम माना जा रहा है।

