उत्तर प्रदेश : नोएडा में डेढ़ साल के एक मासूम की जान समय पर मिले इलाज और डॉक्टरों की सतर्कता से बच गई। घर में खेलते समय बच्चे ने अनजाने में एक छोटा नट-बोल्ट निगल लिया, जिसके बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिवार उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बिना देरी किए उपचार शुरू किया और सफल प्रक्रिया के जरिए नट-बोल्ट बाहर निकाल लिया।
घर में खेलते समय हुआ हादसा
परिजनों के अनुसार बच्चा घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसकी नजर जमीन पर पड़े नट-बोल्ट पर पड़ी और उसने उसे उठाकर मुंह में डाल लिया। कुछ ही क्षणों में वह उसे निगल गया। शुरुआत में किसी को इस बात का पता नहीं चला, लेकिन थोड़ी देर बाद बच्चा लगातार रोने लगा और असहज महसूस करने लगा।
धीरे-धीरे उसने खाना-पीना भी बंद कर दिया और सांस लेने में परेशानी होने लगी। बच्चे की बिगड़ती हालत देखकर परिवार तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचा।
जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत एक्स-रे सहित जरूरी जांच कराई। रिपोर्ट में पता चला कि नट-बोल्ट शरीर के भीतर फंसा हुआ है। स्थिति को गंभीर मानते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्काल एंडोस्कोपिक प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया।
आधुनिक उपकरणों की मदद से बिना किसी बड़े ऑपरेशन के नट-बोल्ट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उपचार सफल रहने के बाद बच्चे को कुछ समय तक निगरानी में रखा गया और हालत सामान्य होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
कुछ मिनट की देरी भी पड़ सकती थी भारी
चिकित्सकों ने बताया कि यदि बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं लाया जाता तो नट-बोल्ट श्वास नली या पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता था। ऐसी स्थिति में उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मामलों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है।
छोटे बच्चों के साथ बरतें अतिरिक्त सावधानी
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार एक से तीन वर्ष की उम्र के बच्चे आसपास पड़ी चीजों को मुंह में डालने की आदत रखते हैं। इसलिए घर में मौजूद नट-बोल्ट, सिक्के, बटन, सेफ्टी पिन, बैटरी, चुंबक, कंचे और अन्य छोटी वस्तुओं को हमेशा उनकी पहुंच से दूर रखना चाहिए।
यदि किसी बच्चे के गले में कोई वस्तु फंस जाए या उसके निगलने की आशंका हो, तो घरेलू उपाय करने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे को जबरन खाना या पानी पिलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सतर्कता से रोके जा सकते हैं ऐसे हादसे
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए घर में थोड़ी सी सावधानी भी बड़े हादसे को टाल सकती है। बच्चों के खेलने की जगह को सुरक्षित रखना, छोटी वस्तुओं को इधर-उधर न छोड़ना और परिवार के सभी सदस्यों को ऐसी आपात स्थिति में सही कदम की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
नोएडा की यह घटना अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है कि छोटे बच्चों पर हर समय नजर रखना और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना उनकी सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी कदम है।

