दिल्ली में एक निजी स्कूल के खिलाफ सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विकासपुरी स्थित इस स्कूल के प्रबंधन को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यदि स्कूल प्रबंधन संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो सरकार स्कूल का संचालन अपने नियंत्रण में लेने की कार्रवाई कर सकती है।
जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां
शिक्षा विभाग की विशेष जांच टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में कई नियम उल्लंघन सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में ऐसे कक्ष संचालित किए जा रहे थे, जिनके लिए आवश्यक अग्नि सुरक्षा स्वीकृति नहीं ली गई थी। इसके अलावा भवन निर्माण से जुड़े नियमों के उल्लंघन और बिना अनुमति अतिरिक्त संरचनाएं खड़ी करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
फायर सेफ्टी को लेकर सबसे बड़ी चिंता
जांच अधिकारियों ने पाया कि कई कक्षाओं में आपात स्थिति के दौरान बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते नहीं थे। साथ ही फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में भी बाधा उत्पन्न होने की आशंका जताई गई। रिपोर्ट में इसे छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम बताया गया है।
बिना अनुमति निर्माण पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान कथित रूप से अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिल और अन्य संरचनाएं भी चिन्हित की गईं। अधिकारियों का कहना है कि इन निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं।
मान्यता और कक्षाओं के संचालन पर भी विवाद
शिक्षा विभाग ने आरोप लगाया है कि स्कूल ने निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की कक्षाओं का संचालन जारी रखा। इस मामले ने उन विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने इन कक्षाओं में प्रवेश लिया था।
फीस वृद्धि और वेतन भुगतान पर भी आरोप
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्कूल पर पूर्व स्वीकृति के बिना फीस बढ़ाने के आरोप हैं। साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में वेतन भुगतान में देरी और वेतनमान से संबंधित मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
स्कूल प्रबंधन को मिला जवाब देने का मौका
शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। विभाग का कहना है कि जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
लीज रद्द करने की सिफारिश भी संभव
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जमीन के आवंटन और लीज शर्तों की भी समीक्षा की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जा सकती है।
छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में स्कूल प्रबंधन के जवाब और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।

