महंगाई के दौर में हर घर के लिए नियमित रूप से घी का उपयोग करना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में अधिकांश परिवार खाना बनाने के लिए सरसों, तिल, नारियल या अन्य खाद्य तेलों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या लंबे समय तक सिर्फ एक ही तेल का उपयोग करना सही है। इस सवाल का जवाब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने अपनी नई डाइटरी गाइडलाइन में दिया है।
एक ही तेल का लगातार इस्तेमाल करने से बचने की सलाह
आईसीएमआर की वर्ष 2024 की डाइटरी गाइडलाइन के अनुसार किसी एक खाद्य तेल का लगातार उपयोग करने के बजाय समय समय पर तेल बदलना बेहतर माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग अलग तेलों में अलग प्रकार के पोषक तत्व और फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसलिए तेल बदलने से शरीर को संतुलित पोषण मिलता है और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है।
तेल को लेकर आईसीएमआर की अहम सलाह
आईसीएमआर ने लोगों को कुछ जरूरी सुझाव भी दिए हैं।
- लंबे समय तक केवल एक ही तेल का उपयोग न करें।
- खाना बनाने में तेल की मात्रा सीमित रखें।
- एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को बार बार गर्म करने से बचें।
- ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
किस तेल में क्या है खास
सरसों का तेल
सरसों का तेल ओलिक एसिड और हेल्दी अनसैचुरेटेड फैट से भरपूर होता है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार माना जाता है और उत्तर भारत में इसका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।
तिल का तेल
तिल के तेल में ओमेगा 6 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण शरीर के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
नारियल का तेल
नारियल के तेल में मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स पाए जाते हैं, जो शरीर को तेजी से ऊर्जा प्रदान करते हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में इसका व्यापक उपयोग होता है।
पाम ऑयल
पाम ऑयल विटामिन ई, टोकोट्रिएनॉल्स और कैरोटेनॉइड्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। ये तत्व शरीर को आवश्यक पोषण देने में मदद करते हैं।
संतुलन ही है सबसे बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी खाद्य तेल पूरी तरह अच्छा या पूरी तरह खराब नहीं होता। हर तेल की अपनी अलग विशेषता होती है। इसलिए सही मात्रा में और समय समय पर अलग अलग तेलों का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी माना जाता है।

