सोशल मीडिया पर इन दिनों हरियाणा का पारंपरिक लोकगीत ‘मेरे ही करम में बावलिया लिखा था’ तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम रील्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस गीत पर बड़ी संख्या में वीडियो बनाए जा रहे हैं। खासकर शादी-ब्याह और पारिवारिक समारोहों के वीडियो में यह लोकगीत लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
लोक संस्कृति से जुड़ा है यह लोकप्रिय गीत
हरियाणा की लोक परंपरा में यह गीत लंबे समय से गाया जाता रहा है। गांवों में शादी समारोह, तीज-त्योहार और अन्य पारंपरिक आयोजनों के दौरान महिलाएं ढोलक, मंजीरे और थाली की थाप पर इसे सामूहिक रूप से गाती हैं। यही वजह है कि यह गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा माना जाता है।
पति-पत्नी के रिश्ते की प्यारी नोकझोंक
गीत में एक पत्नी अपने पति को प्यार से ‘बावलिया’ कहकर संबोधित करती है। हरियाणवी बोली में ‘बावलिया’ का अर्थ सीधा-सादा, भोला या नासमझ व्यक्ति होता है।
गीत के बोलों में पत्नी अपने पति की आदतों और भोलेपन की मजाकिया अंदाज में शिकायत करती है। यह शिकायत नाराजगी नहीं, बल्कि रिश्ते में मौजूद अपनापन, प्यार और हल्की-फुल्की नोकझोंक को दर्शाती है।
इसी सादगी ने बनाया खास
हरियाणवी लोकगीतों की पहचान उनकी सरल भाषा और जीवन से जुड़ी कहानियां होती हैं। इस गीत में भी रोजमर्रा की घरेलू बातों को हंसी-मजाक के साथ प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह गीत वर्षों बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है।
शादी समारोहों की बढ़ी रौनक
आज भी हरियाणा में महिलाएं पारंपरिक दामण, कुर्ती और गोटेदार चुनरी पहनकर इस गीत पर नृत्य करती हैं। ढोलक की थाप के साथ जब यह गीत गूंजता है तो पूरा माहौल उत्सव में बदल जाता है।
नई पीढ़ी भी कर रही पसंद
डिजिटल दौर में इस लोकगीत को नई पहचान मिली है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के जरिए नई पीढ़ी भी हरियाणा की लोक संस्कृति से जुड़ रही है। शादी और पारिवारिक आयोजनों में इस गीत का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक लोकगीतों को नई लोकप्रियता मिल रही है।
किसने लिखा, आज भी नहीं है स्पष्ट जानकारी
इस लोकगीत के मूल रचनाकार या पहली बार इसे गाने वाले कलाकार के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। लोक परंपराओं की तरह यह गीत भी समय के साथ समाज की साझा सांस्कृतिक धरोहर बन गया है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के बीच जीवित है।

