नई दिल्ली। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है। एक तृतीय-पक्ष मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना में सरकार द्वारा लगाए गए प्रत्येक 1 रुपये के बदले कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में 2.30 रुपये का शुद्ध मूल्यवर्धन हुआ है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में यह जानकारी दी। यह मूल्यांकन बेंगलुरु स्थित सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान (आईएसईसी) ने किया है।
ब्याज का बोझ घटाने में मिली बड़ी राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना ने किसानों पर कर्ज के ब्याज का भार कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना लागू होने से लेकर वर्ष 2024-25 तक सरकार की अनुमानित ब्याज सब्सिडी करीब 1.87 लाख करोड़ रुपये रही है।
खेती का दायरा और फसल उत्पादन बढ़ा
मूल्यांकन में सामने आया कि योजना का असर खेती के तौर-तरीकों पर भी सकारात्मक रहा है। लाभार्थी किसानों ने खेती का रकबा बढ़ाया है, फसल सघनता में सुधार किया है और अलग-अलग मौसमों में विविध फसलों की खेती शुरू की है। इसके पीछे सस्ती दर पर ऋण और सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता को प्रमुख कारण बताया गया है।
समय पर खेती की तैयारी और बेहतर ऋण चुकौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्याप्त कार्यशील पूंजी मिलने से किसानों को समय पर बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदने में सुविधा हुई। साथ ही, शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन (पीआरआई) का लाभ लेने वाले किसानों में ऋण चुकाने का अनुशासन भी बेहतर देखने को मिला, जिससे बैंकों का भरोसा मजबूत हुआ।
पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को भी मिला बढ़ावा
योजना का लाभ केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहा। डेयरी, पशुपालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। इससे किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हुए और केवल मौसमी खेती पर निर्भरता कम हुई।
मत्स्य पालन को भी मिली कार्यशील पूंजी
रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्देशीय मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को भी इस योजना से कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिली। खासतौर पर उत्तर-पूर्वी राज्यों में इससे आय के विविधीकरण को बढ़ावा मिला है।
बिना गारंटी ऋण की सीमा बढ़ाई गई
सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने के लिए बिना गारंटी मिलने वाले ऋण की सीमा 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी है। यह नई व्यवस्था 1 जनवरी 2025 से लागू है।
हर साल तय होता है कृषि ऋण का लक्ष्य
केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य तय करती है। इसके साथ ही बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य भी निर्धारित किए जाते हैं, ताकि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों तक पर्याप्त संस्थागत ऋण पहुंच सके।
डिजिटल व्यवस्था से आसान हुई पूरी प्रक्रिया
कृषि ऋण वितरण को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई-किसान क्रेडिट कार्ड और कृषिका जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं। इन माध्यमों से ऋण आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हुई है।
जागरूकता अभियान से बढ़ाया जा रहा दायरा
किसान क्रेडिट कार्ड योजना का अधिक से अधिक किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति तथा विभिन्न बैंक समय-समय पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा केसीसी संतृप्ति अभियान के माध्यम से भी पात्र किसानों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

