लखीमपुर : खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जमानत की शर्तों में और ढील देने तथा पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अपने पैतृक स्थान जाने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जमानत की शर्तों में बदलाव का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे जमानत की शर्तों में अतिरिक्त छूट दी जा सके। अदालत ने संक्षिप्त आदेश में आवेदन खारिज कर दिया।
पारिवारिक कार्यक्रम का दिया गया था हवाला
आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा कि मौजूदा जमानत शर्तों के कारण वह बेटियों के जन्मदिन जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
गवाहों को लेकर पीड़ित पक्ष ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान पीड़ित किसानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रायल की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई तेजी से हो रही है, जिससे कई महत्वपूर्ण गवाहों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को बेहद कम समय का नोटिस दिया गया और समय पर उपस्थित नहीं होने पर उन्हें गवाहों की सूची से हटा दिया गया, जिससे निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट जाने की सलाह दी
इन आपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे सभी मुद्दों पर सबसे पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवेदन किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि कौन-सा गवाह महत्वपूर्ण है और किसका बयान जरूरी है, इसका फैसला निचली अदालत बेहतर तरीके से कर सकती है।
गवाह को प्रभावित करने के आरोप का भी उठा मुद्दा
सुनवाई के दौरान यह मामला भी सामने आया कि एक व्यक्ति पर कथित तौर पर गवाह को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप है। पीड़ित पक्ष ने कहा कि संबंधित गवाह को बाद में सूची से भी हटा दिया गया। इस पर अदालत ने कहा कि इस संबंध में उचित समय पर विचार किया जाएगा, लेकिन पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष ही मामला उठाया जाए।
क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला
3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों पर एक एसयूवी चढ़ा दी गई, जिससे चार किसानों की मौत हो गई। इसके बाद हुई हिंसा में वाहन चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जबकि एक पत्रकार की भी जान चली गई। इस घटना में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।
इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोप तय किए थे।
अब ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल आशीष मिश्रा को जमानत की शर्तों में कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिलेगी। साथ ही गवाहों और सुनवाई प्रक्रिया से जुड़े सभी विवादों पर पहले ट्रायल कोर्ट ही फैसला करेगा, जिससे अब इस बहुचर्चित मामले की कानूनी प्रक्रिया निचली अदालत में आगे बढ़ेगी।

