भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। भारत-रूस आर्मी लैंड सिस्टम सब-ग्रुप (एएलएसएसजी) की पांचवीं बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने की प्रतिबद्धता जताई। चार दिवसीय यह बैठक 4 से 7 अगस्त तक भारत-रूस इंटरगवर्नमेंटल कमीशन ऑन मिलिट्री एंड मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन (आईआरआईजीसी-एम एंड एमटीसी) के तहत आयोजित की गई।
रक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर जोर
बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक के आदान-प्रदान और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ आपसी विश्वास को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
भारतीय और रूसी प्रतिनिधिमंडल ने किया नेतृत्व
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह, डीसीओएएस (सीडी एंड एस) ने किया। वहीं रूसी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई रूस के रक्षा मंत्रालय के मेन आर्मर्ड डायरेक्टरेट के डिप्टी हेड मेजर जनरल अलेक्जेंडर तुफेकची ने की। दोनों अधिकारियों ने रक्षा सहयोग को और प्रभावी बनाने के लिए कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया।
आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर भी बनी सहमति
इस बैठक से पहले नई दिल्ली में भारत-रूस आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक भी आयोजित की गई थी। इस दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, कट्टरपंथ, आतंकवाद के वित्तपोषण और डिजिटल तकनीकों के जरिए बढ़ते आतंकी खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने की थी संयुक्त अध्यक्षता
आतंकवाद निरोधक बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और रूस के उप विदेश मंत्री दिमित्री ल्यूबिंस्की ने की थी। बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के साथ उभरते आतंकी नेटवर्क पर विस्तार से चर्चा हुई।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर करेंगे काम
भारत और रूस ने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
आतंकी घटनाओं की कड़ी निंदा
बैठक के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा की। साथ ही जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना का भी कड़े शब्दों में विरोध किया। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध आतंकवादी संगठनों, उनके सहयोगियों और प्रॉक्सी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

