जम्मू। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में अपनी मांगों को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान लगातार ड्यूटी करने के बावजूद सुविधाओं और सेवा शर्तों में कथित असमानता को लेकर कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 15 अगस्त के बाद हड़ताल जैसा बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
छुट्टियों में भी जारी रहती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र आवश्यक सेवाओं के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उन्हें राष्ट्रीय अवकाश और त्योहारों के समय भी अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और सेवा लाभों में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय तक काम करने और लगातार जिम्मेदारी निभाने के बाद भी उनकी समस्याओं पर प्रशासन की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
समान जिम्मेदारी के बावजूद भेदभाव का आरोप
कर्मचारियों ने सेवा शर्तों और सुविधाओं को लेकर कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि जब सभी कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए समान मेहनत करते हैं, तो लाभ और सुविधाओं के मामले में अंतर नहीं होना चाहिए।
उनकी प्रमुख मांगों में सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करना, कर्मचारियों को उचित लाभ देना और सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना शामिल है।
15 अगस्त के बाद आंदोलन तेज करने की तैयारी
कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 15 अगस्त के बाद आंदोलन को हड़ताल में बदला जा सकता है।
हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर को देखते हुए प्रशासन के सामने कर्मचारियों से बातचीत कर समाधान निकालने की बड़ी चुनौती होगी।
हड़ताल हुई तो मरीजों पर पड़ सकता है सीधा असर
यदि स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं, जांच प्रक्रिया, प्रशासनिक कार्य और अन्य गैर आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजर
फिलहाल सभी की नजर प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं, जबकि मरीजों के हितों को देखते हुए जल्द समाधान निकालना जरूरी माना जा रहा है। यदि बातचीत से रास्ता नहीं निकलता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।

