बरनाला। मानव सेवा और समाज कल्याण की भावना को आगे बढ़ाते हुए 100 वर्षीय अंगरेज कौर इंसां ने अपने जीवन का अंतिम संकल्प भी पूरा कर दिया। निधन के बाद उनके परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए दान कर दिया। उनकी यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
जीवन रहते लिया था देहदान का संकल्प
अंगरेज कौर इंसां ने अपने जीवनकाल में ही यह निर्णय लिया था कि मृत्यु के बाद उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव कल्याण के लिए उपयोग किया जाए। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को प्राथमिकता देते हुए सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं और उनका शरीर संबंधित चिकित्सा संस्थान को सौंप दिया।
सेवा और मानव कल्याण को समर्पित रहा जीवन
परिवार के अनुसार, अंगरेज कौर इंसां हमेशा दूसरों की मदद और समाजसेवा की भावना से जुड़ी रहीं। उम्र के अंतिम पड़ाव में भी उनके विचार मानव कल्याण को लेकर सकारात्मक रहे। देहदान का फैसला भी इसी सोच का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने मृत्यु के बाद भी समाज के लिए उपयोगी बने रहने की इच्छा जताई।
परिवार ने भावनाओं से ऊपर रखा अंतिम संकल्प
किसी अपने को खोने का समय परिवार के लिए बेहद भावुक होता है, लेकिन अंगरेज कौर इंसां के परिजनों ने उनकी इच्छा को सर्वोच्च सम्मान दिया। उन्होंने बिना किसी हिचक के देहदान की प्रक्रिया पूरी कर उनके संकल्प को पूरा किया। परिवार के इस कदम की स्थानीय स्तर पर भी सराहना की जा रही है।
मेडिकल शिक्षा के लिए बेहद उपयोगी होता है देहदान
चिकित्सा शिक्षा में दान किए गए शरीर का विशेष महत्व होता है। मेडिकल विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने के लिए कैडेवर अध्ययन करते हैं। ऐसे में देहदान से भविष्य के डॉक्टरों को प्रशिक्षण प्राप्त करने में मदद मिलती है और चिकित्सा क्षेत्र को आगे बढ़ाने में योगदान मिलता है।
100 वर्ष की उम्र में दिया समाज को बड़ा संदेश
अंगरेज कौर इंसां का यह निर्णय बताता है कि समाजसेवा और मानव कल्याण की भावना उम्र की सीमा से परे होती है। उनका देहदान लोगों को मृत्यु के बाद भी समाज के लिए योगदान देने की प्रेरणा देता है और देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

