नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सरकार से अनुदान प्राप्त ऑटोनोमस बॉडीज में आरक्षण लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसी संस्थाएं सरकारी विभागों की तरह नहीं मानी जा सकतीं, इसलिए इनमें आरक्षण का प्रावधान स्वतः लागू नहीं होता।
कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अनुदान प्राप्त ऑटोनोमस संस्थाएं (Autonomous Bodies) भले ही सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करती हों, लेकिन वे प्रशासनिक रूप से स्वतंत्र होती हैं। इसलिए उन्हें सरकारी संस्था मानकर आरक्षण नीति लागू नहीं की जा सकती। अदालत ने साफ किया कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत तय की गई परिभाषा के अनुरूप है।
याचिकाकर्ता की दलील और कोर्ट का जवाब
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि जब सरकार इन संस्थाओं को फंड देती है, तो वहां भी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों को रोजगार और नियुक्तियों में आरक्षण मिलना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ फंडिंग के आधार पर किसी संस्था को सरकारी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में आरक्षण की बाध्यता लागू नहीं होती।
क्या है ऑटोनोमस बॉडी
ऑटोनोमस बॉडीज वे संस्थाएं होती हैं जिन्हें सरकार से फंड तो मिलता है, लेकिन उनका संचालन अपने बोर्ड या कमेटी द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाता है। इनमें विश्वविद्यालय, शोध संस्थान या कुछ विशेष परिषदें शामिल होती हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब ऐसे सभी संस्थानों पर लागू होगा।