हैदराबाद : नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के कुछ स्नातक छात्रों ने आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि यह संविधान, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक होता है। ऐसे में मुख्य अतिथि का चयन भी उन्हीं मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का दिया हवाला
छात्रों की आपत्ति हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की तत्काल सुनवाई से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है। पत्र में मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 22 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन से संबंधित मामले की तत्काल सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की कुछ कथित टिप्पणियों से वे निराश हुए।
छात्रों के अनुसार, प्रदर्शन में परीक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। उनका कहना है कि सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से रखे गए कुछ तर्कों और कथित पुलिस कार्रवाई को अपेक्षित गंभीरता नहीं मिली। हालांकि, ये बातें मीडिया रिपोर्टों और छात्रों के दावों पर आधारित हैं।
विश्वविद्यालय को लिखा विस्तृत पत्र
स्नातक छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार और शिक्षकों को भेजे पत्र में कहा कि वे ऐसे व्यक्ति से डिग्री प्राप्त करने में असहज महसूस कर रहे हैं, जिनके हालिया सार्वजनिक आचरण को लेकर उनके मन में सवाल हैं। उनका मानना है कि यह स्थिति उन संवैधानिक सिद्धांतों और न्यायिक मूल्यों से मेल नहीं खाती, जिनकी शिक्षा उन्हें विश्वविद्यालय में दी गई है।
पत्र में यह भी कहा गया कि दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन से पहले विश्वविद्यालय को छात्रों से भी विचार-विमर्श करना चाहिए।
पुनर्विचार और संवाद की मांग
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि मुख्य अतिथि के प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाए और यदि अभी तक औपचारिक निमंत्रण जारी नहीं हुआ है तो निर्णय लेने से पहले छात्रों से चर्चा की जाए।
साथ ही उन्होंने प्रशासन से इस विषय पर संवाद का अवसर देने और उनके पत्र का औपचारिक जवाब देने की भी मांग की है।
मामला बना चर्चा का विषय
छात्रों की इस मांग के बाद विश्वविद्यालय परिसर में मुख्य अतिथि के चयन को लेकर बहस तेज हो गई है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन छात्रों की मांग पर क्या फैसला लेता है।

