नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने तीन आरोपियों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने स्वेच्छा से पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के संबंध में अपना फैसला भी 12 अगस्त तक सुरक्षित रख दिया है।
किन आरोपियों की याचिका हुई खारिज
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने आरोपी मंगल लाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की अर्जी खारिज कर दी। तीनों आरोपियों ने अदालत से पॉलीग्राफ और ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) जांच कराने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि वे अपनी बेगुनाही और निष्पक्ष जांच में सहयोग की मंशा दिखाना चाहते हैं।
‘ईमानदारी साबित करने’ का दिया था तर्क
याचिका में आरोपियों ने कहा था कि वे जांच एजेंसी को निष्पक्ष और पारदर्शी जांच में सहयोग देना चाहते हैं। उनका दावा था कि इन वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए वे अपनी नीयत और पक्ष को स्पष्ट करना चाहते हैं। हालांकि अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
चार्जशीट पर फैसला 12 अगस्त को
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई द्वारा 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश फिलहाल टाल दिया। अब इस संबंध में अदालत 12 अगस्त को अपना निर्णय सुनाएगी।

