नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की रणनीतिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और आतंकवाद के खिलाफ देश की अटूट प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने साबित कर दिया है कि भारत आतंकवादी नेटवर्क और उनके ठिकानों पर सटीक एवं प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट संदेश
राष्ट्रपति ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवादी ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। इस अभियान में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला, जिसने भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक क्षमता पर देशवासियों का भरोसा और मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि भारत शांति और मानवता के मूल्यों में विश्वास रखने वाला देश है, लेकिन आतंकवाद के सामने चुप रहना उसकी नीति नहीं है। भारत किसी पर पहले हमला करने की नीति नहीं अपनाता, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर निर्णायक जवाब देने से भी पीछे नहीं हटेगा।
आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए और उसे संरक्षण देने वाले नेटवर्क तथा ढांचे को खत्म करना वैश्विक शांति के लिए जरूरी है।
राष्ट्रीय एकता बनी सबसे बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि आतंकवादी शक्तियां समाज में भय और विभाजन पैदा करना चाहती हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद देशवासियों ने एकजुट होकर इसका जवाब दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर नागरिकों, राजनीतिक दलों और विभिन्न संस्थाओं ने भारतीय सशस्त्र बलों का समर्थन किया, जो देश की सबसे बड़ी ताकत है।
दुनिया के सामने मजबूती से रखा भारत का पक्ष
राष्ट्रपति ने बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न देशों में जाकर आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट पक्ष रखा। इन प्रतिनिधिमंडलों ने दुनिया को बताया कि भारत आक्रामक राष्ट्र नहीं है, लेकिन अपने नागरिकों पर हमले का जवाब देने में कभी संकोच नहीं करेगा।
आत्मनिर्भर भारत से बढ़ी रक्षा शक्ति
राष्ट्रपति ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्वदेशी रक्षा तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भारतीय रक्षा उद्योग अब ऐसी क्षमता विकसित कर चुका है कि देश अपनी कई रणनीतिक जरूरतें स्वयं पूरी कर सकता है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों और आधुनिक तकनीकों ने अभियान की सफलता में अहम योगदान दिया।
तीनों सेनाओं पर जताया भरोसा
राष्ट्रपति ने भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की तैयारियों पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि देश की तीनों सेनाएं हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने सियाचिन में तैनात सैनिकों के साहस, सुखोई और राफेल लड़ाकू विमानों की क्षमता, स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और पनडुब्बी आईएनएस वाग्शीर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सैनिक कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उनकी बहादुरी और समर्पण ही भारत की सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है।

