नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर की गई टिप्पणी और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का उल्लेख किए जाने के बाद शुरू हुए राजनीतिक विवाद पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े सभी लोगों को विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों के बारे में टिप्पणी करते समय संयम, सम्मान और कूटनीतिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और इटली के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जिन्हें दोनों देश लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कहा कि राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करना सभी का अधिकार है, लेकिन विदेशी नेताओं से जुड़े बयान जिम्मेदारी और सम्मान के साथ दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विदेश नीति और अन्य देशों के नेतृत्व पर की गई सार्वजनिक टिप्पणियों का असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। इसलिए राजनीतिक बहस के दौरान शब्दों का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद 13 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि वह विदेशी नेताओं को गले लगाने को ही विदेश नीति मानते हैं।
इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को मंच पर बुलाकर गले लगाया। इस पर संदीप दीक्षित ने हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि कहीं उन्हें इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगाया गया। राहुल गांधी ने जवाब दिया कि वह अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पर हंसी जताई, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।
भाजपा ने जताई आपत्ति
भाजपा ने राहुल गांधी और संदीप दीक्षित की टिप्पणियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक बताते हुए इसकी आलोचना की। पार्टी के कई नेताओं ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग भी की।
कांग्रेस का बचाव
कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य किसी विदेशी नेता का अपमान करना नहीं था। पार्टी के अनुसार यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और उनकी कूटनीतिक शैली पर किया गया राजनीतिक व्यंग्य था, न कि किसी मित्र देश या उसके नेतृत्व पर टिप्पणी।
भारत-इटली संबंधों का बढ़ा महत्व
पिछले कुछ वर्षों में भारत और इटली के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को विशेष रणनीतिक साझेदारी तक विस्तार देने पर सहमति जताई थी। व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, आधुनिक तकनीक, संपर्क व्यवस्था और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि घरेलू राजनीतिक बहस में भी विदेशी नेताओं और मित्र देशों से जुड़े संदर्भों का इस्तेमाल करते समय कूटनीतिक शिष्टाचार और सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।

