उज्जैन। सावन मास और हरियाली तीज के पावन अवसर पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में धार्मिक आस्था के साथ देशभक्ति का भी अनोखा दृश्य देखने को मिला। बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार राष्ट्रीय ध्वज के रंगों की थीम पर किया गया। भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
तिरंगे के रंगों में दिखा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप
स्वतंत्रता दिवस के उत्साह और हरियाली तीज की धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रृंगार में केसरिया, सफेद और हरे रंगों को प्रमुखता से शामिल किया गया, जो राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों का प्रतीक रहे।
बाबा महाकाल के इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह नजर आया। भक्तों ने दर्शन के दौरान भगवान के जयकारे लगाए और इस अद्भुत श्रृंगार को अपने लिए यादगार अनुभव बताया।
भस्म आरती में तड़के से उमड़ी भक्तों की भीड़
महाकालेश्वर मंदिर की प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। हरियाली तीज के मौके पर भी तड़के बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और शिव भक्ति का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल से परिवार की सुख-शांति के साथ देश की समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की।
हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की आराधना का विशेष महत्व
हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से जुड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं। देशभर के शिव मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में हरियाली तीज के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की आस्था और भी गहरी दिखाई दी।
धर्म और राष्ट्रभक्ति का मेल बना आकर्षण का केंद्र
इस बार हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस का अवसर आसपास होने के कारण उज्जैन में धार्मिक वातावरण के साथ देशभक्ति का भाव भी नजर आया। बाबा महाकाल के तिरंगे रंगों वाले श्रृंगार ने इस भावना को और खास बना दिया।
मंदिर प्रशासन ने बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए दर्शन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और इस खास अवसर को अपनी धार्मिक यात्रा की यादगार कड़ी के रूप में संजोया।

