रात में सोते समय खर्राटे लेना आम समस्या हो सकती है, लेकिन हर स्थिति को सामान्य मानना सही नहीं है। अगर खर्राटे बहुत तेज हों, लंबे समय तक जारी रहें या उनके साथ नींद में सांस रुकने जैसी परेशानी भी दिखाई दे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे लक्षण नींद से जुड़ी किसी समस्या, खासकर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया यानी OSA की ओर इशारा कर सकते हैं।
कब खर्राटे बन सकते हैं चिंता की वजह
हर व्यक्ति के खर्राटे किसी बीमारी का संकेत नहीं होते। चिंता तब बढ़ती है, जब खर्राटों के साथ सांस लेने के तरीके में असामान्य बदलाव दिखाई देने लगें। परिवार के सदस्य अक्सर सोते समय होने वाली ऐसी परेशानियों को सबसे पहले नोटिस कर सकते हैं।
नींद में सांस रुकना है अहम संकेत
अगर सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस रुकती है और उसके बाद व्यक्ति अचानक तेज सांस लेता है, तो यह OSA का संभावित संकेत हो सकता है। इस स्थिति में सांस की नली नींद के दौरान बार-बार संकरी या बंद हो सकती है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
हांफना, घुटन और अचानक नींद खुलना
खर्राटों के बीच अचानक हांफने, घुटन महसूस होने या नींद टूटने की समस्या भी सामान्य खर्राटों से अलग मानी जाती है। अगर ऐसी स्थिति बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
पूरी नींद के बाद भी दिनभर थकान
रात में पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद अगर सुबह उठने के बाद भी थकान बनी रहती है या दिनभर बार-बार नींद आती है, तो नींद की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। काम करते समय झपकी आना या लगातार सुस्ती महसूस होना भी ध्यान देने योग्य लक्षण हैं।
कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ सकती है चिंता
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का संबंध कुछ स्वास्थ्य स्थितियों से भी देखा जाता है। हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी समस्याओं वाले लोगों में नींद से जुड़ी सांस की परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सिर्फ खर्राटों से नहीं होता OSA का पता
केवल खर्राटे आने से यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को स्लीप एपनिया है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के बाद जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी या अन्य स्लीप टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
नई दिल्ली स्थित एम्स में नींद से जुड़ी समस्याओं के लिए स्लीप डिसऑर्डर क्लिनिक और स्लीप लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लगातार तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने, रात में घुटन या दिनभर अत्यधिक नींद जैसे लक्षण नजर आएं, तो विशेषज्ञ से जांच कराना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

