पटना : सोमवार को जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव शुरू होने जा रहा है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद वह बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। विधानसभा के मुख्य भवन में अध्यक्ष प्रेम कुमार के कार्यालय कक्ष में सुबह 10:30 बजे शपथ ग्रहण समारोह रखा गया है।
बिहार विधानसभा के उप सचिव की ओर से जारी पत्र में प्रशांत किशोर को तय समय और स्थान पर पहुंचकर शपथ लेने के लिए कहा गया है। शपथ के साथ ही वह औपचारिक तौर पर विधायक के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल लेंगे।
एक जीत जिसने राजनीतिक सफर को नई दिशा दी
बांकीपुर उपचुनाव प्रशांत किशोर के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को हराकर जन सुराज पार्टी को विधानसभा में पहली बार प्रतिनिधित्व दिलाया।
यह चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका शुरू करने के बाद प्रशांत किशोर की पहली बड़ी चुनावी जीत भी रही। नई राजनीतिक पार्टी के लिए यह परिणाम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उसने अपने शुरुआती दौर में ही विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी।
19 हजार से ज्यादा वोटों से दर्ज की बड़ी जीत
बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था और 3 अगस्त को मतगणना कराई गई। मतगणना के दौरान प्रशांत किशोर ने अपनी बढ़त बनाए रखी और अंत में 19,324 मतों के अंतर से चुनाव जीत लिया।
उन्हें कुल 64,151 वोट मिले। भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट मिले, जबकि आरजेडी प्रत्याशी रेखा गुप्ता 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
जिस सीट को लंबे समय से मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां बदला समीकरण
प्रशांत किशोर की जीत का महत्व केवल उनके विधायक बनने तक सीमित नहीं है। बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा के मजबूत इलाकों में गिना जाता रहा है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का प्रभाव बना हुआ था।
ऐसे में इस उपचुनाव में भाजपा की हार और जन सुराज के उम्मीदवार की जीत ने स्थानीय राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। नई पार्टी के लिए यह नतीजा आगे की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अब विधानसभा में पहली बार दिखेगा जन सुराज का चेहरा
शपथ ग्रहण के बाद प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा में जन सुराज पार्टी के पहले निर्वाचित विधायक के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी जीत से पार्टी को राज्य विधानसभा में पहली औपचारिक राजनीतिक मौजूदगी मिली है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि विधानसभा के भीतर प्रशांत किशोर किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं और विधायक के रूप में उनकी राजनीतिक भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है। बांकीपुर की जीत ने उन्हें चुनावी राजनीति में मजबूत शुरुआत तो दे दी है, लेकिन विधानसभा में उनकी सक्रियता आने वाले समय में जन सुराज की राजनीतिक पहचान और प्रभाव का अगला परीक्षण होगी।

