सहारनपुर। वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रीय गीत का अपमान नहीं करेंगे और इसके सम्मान में खड़े भी होंगे, लेकिन धार्मिक आस्था के कारण वे अल्लाह के अलावा किसी की वंदना या इबादत नहीं करेंगे।
मसूद ने कहा कि संविधान उन्हें अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आचरण करने का अधिकार देता है और यह अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता।
सम्मान करेंगे, लेकिन गाने को लेकर अलग है रुख
इमरान मसूद ने कहा कि राष्ट्रगान उनके लिए सर्वोच्च है और देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किया जाना चाहिए। वंदे मातरम् को लेकर उन्होंने कहा कि वह इसका अपमान नहीं करेंगे, लेकिन इसे गाना उनके धार्मिक विश्वास के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए किसी को बार-बार प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक कांग्रेस के अधिवेशनों में लंबे समय से वंदे मातरम् का गायन होता रहा है और वह इसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता को बताया संवैधानिक अधिकार
सांसद ने अपने रुख के समर्थन में संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत इबादत करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
मसूद ने कहा कि वह देश और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हैं, लेकिन अपनी धार्मिक आस्था के मामले में अल्लाह के अलावा किसी अन्य की वंदना नहीं कर सकते।
भाजपा पर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप
कांग्रेस सांसद ने भाजपा पर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान जैसे विषयों को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों के जरिए समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
मसूद के बयान के बाद वंदे मातरम् को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राष्ट्रीय गीत के सम्मान, नागरिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पहले से ही बयानबाजी जारी है।

