नई दिल्ली : वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय PSB कॉन्फ्लुएंस 2026 का समापन हो गया। सम्मेलन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों, सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बैंकिंग क्षेत्र के अगले चरण को लेकर व्यापक मंथन किया।
सम्मेलन के दौरान बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े सात प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। दूसरे दिन कृषि और बागवानी क्षेत्र की वैल्यू चेन, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए नजरिए से विकसित करने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
16 साल से अधिक उम्र के युवाओं पर बैंकों का फोकस, अक्टूबर से शुरू होगा अभियान
समापन सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपनी क्षमताओं को मजबूत करने और बदलती आर्थिक जरूरतों के मुताबिक नई रणनीतियां तैयार करने को कहा।
उन्होंने युवाओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। इसके तहत 2 अक्टूबर 2026 से 16 वर्ष से अधिक उम्र के युवाओं के लिए एक महीने का अभियान चलाने की योजना है। इस पहल का समन्वय इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के माध्यम से किया जाएगा।
एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बैंकिंग, शिक्षा और करियर से जुड़ी जानकारी देने की तैयारी
इस अभियान का उद्देश्य युवाओं के साथ बैंकों का शुरुआती स्तर से मजबूत और लंबे समय का संबंध बनाना है। बैंकिंग व्यवस्था में शामिल होने के बाद युवाओं की जरूरतें समय के साथ शिक्षा, रोजगार, कारोबार, निवेश और संपत्ति निर्माण तक बदलती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बैंक अपनी सेवाओं को युवाओं की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर देंगे।
युवाओं के लिए एक साझा ऑनलाइन पोर्टल या एप्लीकेशन तैयार करने की योजना भी सामने रखी गई है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं के साथ शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और उद्यमिता से जुड़ी उपयोगी जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक पहुंचेगा अभियान, युवाओं से सीधे जुड़ने की योजना
डिजिटल पहल के साथ अभियान को जमीनी स्तर पर भी बढ़ाया जाएगा। कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज, स्किल संस्थानों और अन्य कैंपस के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाने की योजना है। इसके अलावा युवाओं को केंद्र में रखकर विशेष संवाद और संपर्क कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
इसका मकसद सिर्फ बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था और उपलब्ध वित्तीय अवसरों से लगातार जोड़े रखना होगा।
Priority Sector Lending पर बैंकों को सख्त निगरानी और बेहतर रणनीति का निर्देश
सम्मेलन में प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। वित्त मंत्री ने बैंकों से अलग-अलग लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों के मुकाबले होने वाली कमी की लगातार निगरानी करने को कहा।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को संभावित कमी की पहले से पहचान करने और उसके अनुसार कारोबारी रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जरूरतमंद और पात्र लाभार्थियों तक उत्पादक ऋण सही समय पर पहुंच सके।
किसानों से लेकर क्रेडिट कार्ड ग्राहकों तक, वित्तीय सेवाओं में बदलाव पर मंथन
सम्मेलन के दौरान कृषि और बागवानी वैल्यू चेन में वित्तपोषण बढ़ाने के कई अवसरों पर चर्चा हुई। इसमें किसान उत्पादक संगठनों, भंडारण, प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और बाजार से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता की संभावनाएं शामिल रहीं।
क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए तरीके से विकसित करने पर हुई चर्चा में डिजिटल ऑनबोर्डिंग, मौजूदा ग्राहकों को अतिरिक्त वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने और RuPay-UPI इंटीग्रेशन से मिलने वाले अवसरों पर विचार किया गया।
VNR ग्रुप के डायरेक्टर CA अरविंद अग्रवाल ने कृषि और बागवानी वैल्यू चेन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वहीं Toy Zone के डायरेक्टर संजय मेहंदीरत्ता ने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग से जुड़े अपने व्यावहारिक अनुभव और कारोबारी सफर के पहलुओं पर जानकारी दी।
सात विषयों पर बनी रणनीति अब जमीन पर उतारने की चुनौती
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने कहा कि सम्मेलन से सात प्रमुख विषयों पर प्राथमिकताएं तय करने और स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिली है। अब संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इन योजनाओं के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी और समयसीमा तय करके काम करना होगा।
सम्मेलन में सामने आए सफल संस्थागत मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ वित्तीय समावेशन को मजबूत करना है।
विकसित भारत 2047 की दिशा में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका और बढ़ेगी
PSB कॉन्फ्लुएंस 2026 में सरकार, बैंकिंग संस्थानों और विशेषज्ञों के अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। अब इन चर्चाओं से निकले सुझावों को लागू करना संबंधित संस्थानों की अगली बड़ी जिम्मेदारी होगी।
भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ने के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और वित्तीय संस्थान वित्तीय समावेशन बढ़ाने, नए क्षेत्रों के लिए पूंजी उपलब्ध कराने और देश की आर्थिक विकास यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

